हिंदू धर्म में आरती का बहुत ही खास महत्व है. आरती का जिक्र स्कंद पुराण में भी किया गया है.
किसी भी पूजा पाठ, यज्ञ, अनुष्ठान के अंत में देवी-देवताओं की आरती की जाती है और आरती के साथ कुछ मंत्रों का भी उच्चारण किया जाता है.
वहीं, हर आरती कर्पुर आरती के बिना अधूरी मानी जाती है. कर्पुर शब्द का मतलब कपूर के समान. दरअसल, पूजा में कपूर सबसे ज्यादा शुद्ध माना जाता है.
कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्। सदावसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥
कपूर जब भी जलाया जाता है तो उसके कोई भी अवशेष नहीं छूटते हैं. बल्कि, वो एकदम समाप्त हो जाता है.
ठीक उसी प्रकार हमें भगवान से प्रार्थना करनी चाहिए कि जिस तरह से जलने के बाद कपूर कुछ नहीं छोड़ता है, उसी तरह जब हम ये जीवन छोड़े तो हम हर कर्म से मुक्त हो जाएं.
आखिरी सांस के समय हमारा ये शरीर जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्त हो जाए.
जब भी कपूर जलता है तो उसमें से एक अलग तरह की खुशबू आती है, जिससे आसपास का माहौल एकदम शुद्ध और पवित्र हो जाता है.
ठीक उसी तरह जब हम ये जीवन छोड़े तो हमारे लिए हर किसी के दिल में एक अच्छी याद छूट जाए.
सनातन धर्म के प्राचीन ग्रंथों में लिखा है कि आरती में देवताओं के सामने कपूर जलाना सबसे ज्यादा शुभ माना जाता है.