28 nov 2024
aajtak.in
मार्गशीर्ष अमावस्या को अगहन अमावस्या के नाम से जाना जाता है. इस बार मार्गशीर्ष अमावस्या की पूजा 30 नवंबर को की जाएगी.
मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन पितरों की शांति और तर्पण के लिए स्नान, दान और ध्यान किया जाता है.
मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की उपासना की जाती है और सत्यनारायण पूजा भी जाती है.
इस बार मार्गशीर्ष अमावस्या की तिथि 30 नवंबर को सुबह 10 बजकर 29 मिनट पर शुरू होगी और तिथि का समापन 1 दिसंबर को सुबह 11 बजकर 50 मिनट पर होगा. इसलिए, उदयातिथि के अनुसार, मार्गशीर्ष अमावस्या इस बार 30 नवंबर को ही मनाई जाएगी.
मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान-दान का कार्य किया जाएगा. इस दिन स्नान के लिए सुबह 5:08 मिनट से लेकर सुबह 6:02 मिनट तक का मुहूर्त मिलेगा.
मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन सूर्योदय से पहले उठकर किसी पवित्र नदी में स्नान करें. स्नान के बाद पूजा करें और व्रत का संकल्प करें.
इसके पश्चात भगवान सूर्य को अर्ध्य देते हुए अपने पितरों को याद करें. इस दिन पितरों के नाम पर दान और धर्म का कार्य करें. फिर भगवान विष्णु और शंकर की पूजा करें.
मार्गशीर्ष अमावस्या पर सूर्यास्त के बाद पीपल के नीचे तिल के तेल का दीपक जलाएं. पांच तरह की मिठाइयों को अलग-अलग पांच पीपल के पत्तों पर रखें और ''ऊं सर्वेभ्यो पितृदेवेभ्यो नमः'' मंत्र का जाप करें.