कौन हैं कथावाचक प्रदीप मिश्रा? जिन पर प्रेमानंद महाराज के बाद आगबबूला हो रहे संत

कथावाचक प्रदीप मिश्रा राधाजी पर विवादित टिप्पणी के चलते संतों के निशाने पर आ गए हैं. प्रेमानंद महाराज के बाद अब ब्रज के संत समाज ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.

आइए जानते हैं कि कथावाचक प्रदीप कौन हैं और किस विवादित बयान के चलते ब्रज के संत समाज ने उनके खिलाफ आवाज उठाई है.

कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा का जन्म मध्य प्रदेश के सीहोर में एक मिडिल क्लास फैमिली में हुआ था. इनका उपनाम रघु है.

कौन हैं प्रदीप मिश्रा?

सूत्रों के अनुसार, कथावाचक प्रदीप मिश्रा ने ग्रेजुएशन तक पढ़ाई की है. वह अपने स्कूल के समय से ही पंडिताई और कथावाचन में दिलचस्पी रखने लगे थे.

प्रदीप मिश्रा ने सबसे पहले सीहोर में कथावाचक के रूप में मंच संभाला. उन्होंने शिव मंदिर से कथावाचन शुरू किया. 

वो शुरू से ही शिवपुराण का प्रवचन ज्यादा करते हैं.

वह कथा के दौरान भक्तों को समस्याओं से निजात पाने का उपाय भी बताते हैं. इसी कारण उनकी प्रसिद्धि धीरे-धीरे बढ़ने लगी. आज इन्हें करोड़ों लोग देखते-सुनते हैं.

प्रदीप मिश्रा राधा रानी पर विवादित टिप्पणी की थी. उन्होंने कहा था, 'भगवान कृष्ण की 16,108 रानियों में राधाजी का नाम नहीं है. और राधा के पति में कृष्ण का नाम नहीं है.'

क्या है विवाद?

'राधा के पति का नाम अनय घोष था. वो बरसाने की नहीं, ग्राम रावल की थीं. बरसाने में राधा के पिताजी की कचहरी थी, जहां वो वर्ष में एक बार आती थीं. इसलिए इसका नाम बरसाना पड़ा.'  इसके बाद ही प्रेमानंद महाराज ने कहा था कि राधारानी के बारे में ऐसी बातें करने वाले नर्क जाएंगे.