28 Nov 2024
By: Aajtak.in
वृंदावन वाले मशहूर प्रेमानंद महाराज के पास दूर-दूर से लोग अपनी समस्याएं लेकर आते हैं.
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महाराज उन समस्याओं का हल बड़ी ही सूझबूझ के साथ अपने पास आए लोगों को देते हैं. ऐसी ही अपनी एक समस्या लेकर भीमशंकर संस्थान के पुजारी उनके पास पहुंचे.
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पुजारी ने प्रेमानंद महाराज से कहा कि मंदिर में कुछ महिला भक्त छोटे-छोटे कपड़े पहनकर आती हैं. हम उनसे कहते हैं कि वह ऐसे अंगप्रदर्शित करने वाले कपड़े ना पहनकर आएं.
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इस बात को सुनकर वह कहते हैं कि हमारी मर्जी आपको क्या? आपको क्या अधिकार है? ऐसा कहकर वे महिला भक्त लड़ने लग जाती हैं.
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प्रेमानंद महाराज कहते हैं कि मन और इंद्रिय की गुलामी को स्वतंत्रता माना गया है. शास्त्र और गुरुजनों की आज्ञा को परतंत्रता माना गया है.
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ऐसे में अगर उन महिला भक्तों को संतों और शास्त्रों के वचनों में श्रद्धा ही नहीं है तो मन के अनुसार आचरण रखना स्वाभाविक है. अब आपको खुद अपने आपको बचाना है.
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प्रेमानंद महाराज पुजारी को समझाने के लिए कहते हैं कि यदि आपकी बहन हो और छोटे कपड़े पहनती हो, तो क्या अपनी बहन को देखकर आपको काम भाव आएगा? नहीं ना.
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ऐसे में महाराज कहते हैं कि आप अपनी दृष्टि को पावन करें. अब समाज को पावन करने का सामर्थ्य भगवान में है या भगवान जिन संतों को वैसी शक्ति देता है उनके नहीं तो उसमें सुधार करना असंभव सा है.
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महाराज आगे बोले, 'क्योंकि इन दिनों मनचाहे आचरणों का लोग पालन करते हैं. शास्त्रों की आज्ञा का पालन नहीं किया जा रहा है.'
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महाराज के अनुसार, मुझे लगता है कि आप लोगों को अपनी दृष्टि ठीक कर लेनी चाहिए और अपने भावों को शुद्ध रखना चाहिए.
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