By Aajtak.in
भगवान शिव का प्रिय सावन का महीना चल रहा है. उनके ज्यादातर भक्त शिवजी के दो पुत्रों के बारे में ही जानते हैं- कार्तिकेय और गणेश.
कम ही लोगों को यह मालूम होगा कि शिवजी की एक बेटी भी थी- अशोक सुंदरी. देश के कई हिस्सों में अशोक सुदरी की कहानी लोकप्रिय है.
पद्म पुराण में अशोक सुंदरी की कहानी दर्ज है. एक बार पार्वती ने शिवजी से दुनिया का सबसे सुंदर बगीचा देखने की इच्छा जाहिर की.
इसलिए शिवजी उन्हें नंदनवन ले गए, जहां पार्वती को एक कल्पवृक्ष से लगाव हो गया. यह मनोकामना पूरी करने वाला वृक्ष है.
पार्वती अपना एकाकीपन दूर करना चाहती थी. इसलिए उन्होंने कल्पवृक्ष से एक बेटी मांगी. तब कल्पवृक्ष से अशोक सुंदरी का जन्म हुआ.
शिवलिंग पर जल अर्पित करते समय जहां से जल नीचे की ओर बहकर निकलता है, उस जगह को अशोक सुंदरी कहते हैं.
अशोक सुंदरी की पूजा के लिए सोमवार का दिन श्रेष्ठ है. सुबह स्नानादि के बाद भगवान शिव, पार्वती और शिवलिंग की स्थापना करें.
इसके बाद घी का दीपक जलाएं और पुष्प आदि अर्पित करें. शिवलिंग पर अशोक सुंदरी के स्थान पर फल, फूल अर्पित करना न भूलें.
भोलेनाथ की तरह इनकी पूजा में भी बेलपत्र जरूर चढ़ाएं. कहते हैं इनकी पूजा से धन और व्यापार से जुड़ी समस्याओं का अंत होता है.