7 Jan 2025
AajTak.In
10 जनवरी को साल 2025 की पहली एकादशी है. यह वैकुण्ठ एकादशी है. वैकुण्ठ का मतलब विष्णु लोक यानी एक ऐसा परम धाम जहां स्वयं विष्णु वास करते हैं.
ज्योतिषविदों का कहना है कि वैकुण्ठ एकादशी पर कुछ चीजें घर लाने से भाग्य चमक सकता है. शास्त्रों के अनुसार, ये चीजें समुद्र मंथन के दौरान निकली थीं.
विष्णु पुराण के अनुसार, समुद्र मंथन के आठवें चरण में माता लक्ष्मी ने प्रकट लिया था. वैकुण्ठ एकादशी पर आप मां लक्ष्मी की एक नई प्रतिमा घर ला सकते हैं.
समुद्र मंथन से जो 14 रत्न निकले थे, उनमें से एक पारिजात का पौधा भी था. इस वृक्ष को स्वयं देवराज इंद्र ने स्वर्ग में स्थापित किया था.
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पारिजात का वृक्ष देवी लक्ष्मी को प्रिय है और एक वरदान के रूप में आज भी धरती पर मौजूद है. इसका पौधा घर में रखने से सुख-संपन्नता बढ़ती है.
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ऐसी मान्यता है कि समुद्र मंथन के दूसरे चरण में कामधेनु गाय निकली थी. कामधेनु गाय को ब्रह्मवादी ऋषियों ने ग्रहण किया था.
विष्णु पुराण के अनुसार, कामधेनु गाय मन की निर्मलता का प्रतीक है. इसकी प्रतिमा दुकान के गल्ले या तिजोरी के पास रखने से धन की आवक बढ़ती है.
शास्त्रों में शंख को माता लक्ष्मी का भाई माना गया है. शंख समुद्र मंथन में मिले 14 रत्नों में से एक है. इसे घर में रखने से धन की कभी कमी नहीं होती है.