प्रेम क्या है, किसी को याद करना या किसी के बारे में सोचना? प्रेमानंद महाराज ने बताया

7 Feb 2025

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ह‍ित प्रेमानंद गोविंद शरण महाराज को सभी लोग प्रेमानंद महाराज के नाम से जानते हैं.

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प्रेमानंद महाराज को हर उम्र के लोग काफी ध्यान से सुनते हैं और उनकी बातों को अमल में भी लाते हैं.

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कई लोग हैं जो प्रेमानंद महाराज के पास अपनी समस्याएं लेकर भी जाते हैं और उनसे सवाल पूछते हैं.

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कुछ समय पहले एक लड़का प्रेमानंद महाराज के पास पहुंचा और उनसे पूछा, 'प्रेम क्या है? किसी को याद करना प्रेम है. किसी के बारे में सोचना प्रेम है. हर वक्त उसकी ख्याल रहना प्रेम है या उसका चिंतन या उसके बारे में सोचना प्रेम है?'

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प्रेमानंद महाराज ने कहा, 'एक ही बात है. याद करना, चिंतन करना सोचना. पर प्रेम शब्द सार्थक होता है सच्चिदानंद पर.' 

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'आजकल जो प्रेम शब्द का प्रयोग पार्थिव और भौतिक शरीर के भोगों को कहा गया है, उसे प्रेम नहीं उसे काम कहा गया है.' 

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'ये जो पुरुष-स्त्री संबंधी आकर्षण है, बोलते हैं, ये प्रेम है. इसे काम कहते हैं, प्रेम नहीं कहते.'

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'प्रेम होता है, सत् चित् आनंद में. प्रेम होता प्प्रतिक्षण वर्धमानम (हर पल आनंद बढ़ना).'

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'प्रेम होता कामना रहित. प्रेम होता अनुभव स्वरूपम यानी जिसे अनुभव कर सको.'

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