21 August 2024
Credit: University of Manchester
मिस्र में वैज्ञानिकों को मगरमच्छ की तीन हजार साल पुरानी ममी मिली. ये ममी नील नदी के देवता सोबेक को चढ़ाई गई थी.
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मिस्र के प्राचीन लोग सिर्फ अपने रिश्तेदारों की ही ममी नहीं बनाते थे. बल्कि उन्होंने हजारों जानवरों को भी संरक्षित किया.
मिले हुए मगरमच्छ के बारे में वैज्ञानिकों ने पता लगाया कि वो मरा कैसे. उसका अंतिम भोजन क्या था.
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इस मगरमच्छ की लंबाई 2.23 मीटर है. यह बर्मिंघम म्यूजियम और आर्ट गैलरी में रखी गई है. इसे रॉयल मैनचेस्टर चिल्ड्रेन हॉस्पिटल में लाकर इसका रेडियोग्राफिक स्टडी किया गया.
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मगरमच्छ के पेट में गैस्ट्रोलिथ्स मिले. गैस्ट्रोलिथ्स छोटे-छोटे पत्थर होते हैं, जो आहार नाल में मिले. पेट के अंदर धातु के मछली पकड़ने वाला कांटा और मछली मिली.
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मिस्र में अलग-अलग जानवरों का अलग-अलग देवताओं से कनेक्शन था. जैसे बाज का सूरज के देवता होरस से. क्योंकि वो सूरज के नजदीक उड़ सकता था. बिल्ली का देवी बास्टेट से.