बहुत सारे लोग अक्सर कहते पाए जाते हैं कि वे कितनी भी शराब पी लें लेकिन उनको चढ़ती ही नहीं.
क्या ज्यादा शराब पीने की कैपिसिटी शरीर के मजबूत प्रतिरोधक क्षमता का सबूत है?
अगर पीने के बाद भी नशा न हो रहा हो तो अलर्ट हो जाने की जरूरत है क्योंकि यह सेहत के लिए बेहद खतरनाक है.
शराब पीने की कैपिसिटी एक दिन में विकसित नहीं होती. गुजरते वक्त के साथ पीने वाले में 'एल्कॉहल टॉलरेंस' पैदा हो जाती है.
दरअसल, पीने वाला शख्स हर बार पिछली बार जैसे नशे का अनुभव करने के लिए अगली बार और ज्यादा शराब पीने लगता है.
इससे धीरे-धीरे शराब की लत लग जाती है और पीड़ित शख्स शराब पीए बिना सामान्य महसूस नहीं कर पाता.
ऐसे लोगों को लगने लगता है कि बिना शराब जिंदा रहना संभव नहीं है. फिर वे बेहिसाब पीते हैं और एल्कॉहल उनकी जिंदगी का स्थाई हिस्सा बन जाता है.
हमारे दिमाग में एक केमिकल होता है, जिसे गामा अमीनोब्यूट्रिक एसिड या GABA कहते हैं. इससे हमारे शरीर की इंद्रियां ढंग से काम करती हैं.
मेडिकल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, लगातार शराब पीने से गाबा रिसेप्टर्स पर बुरा असर पड़ता है, जिससे चिंता या तनाव का स्तर बढ़ जाता है.
गाबा रिसेप्टर्स के ढंग से काम न करने की वजह से ज्यादा शराब पीने की जरूरत महसूस होती है और धीरे धीरे लत पड़ने का खतरा पैदा हो जाता है.
इसी केमिकल असंतुलन की वजह से शराब तुरंत छोड़ पाना भी मुमकिन नहीं होता. इसे विदड्रॉल सिम्पटमस कहते हैं.
शराब न पीने पर शरीर या किसी हिस्से के कांपने, पसीना आने या सिर चकराने के लक्षण दिखे तो समझ जाएं कि यह एल्कॉहल विदड्रॉल के लक्षण हैं.