शरीर में मौजूद कैंसर ट्यूमर की वजह से शरीर से अलग तरह का केमिकल निकलता है. ये रसायन पसीने और पेशाब के साथ बाहर निकलता है.
अब चींटियां इसी केमिकल को सूंघकर पहचान लेंगी और किसी बड़ी जांच से पहले ही पता लग सकेगा कि किसी को कैंसर है, या नहीं.
यूरोप और दक्षिण एशिया में बहुतायत में मिलने वाली फॉर्मिका फ्यूस्का चींटियों के इस्तेमाल से हुए अध्ययन को अहम बायोमार्कर माना जा रहा है.
इससे बिना किसी खर्च और शरीर में जख्म के कैंसर की काफी हद तक पहचान हो सकी.
बेहद तेज नाक वाले कुत्तों को लंबे समय से ट्रेनिंग मिल रही है कि वे इंसानों में कैंसर की पहचान कर सकें.
ज्यादातर मामलों में जब तक पहचान होती है, बीमारी काफी एडवांस हो चुकी होती है. एक्सपर्ट आसान तरीके खोज रहे हैं ताकि शुरुआती अवस्था में ही सिग्नल मिल जाए.
फ्रेंच नेशनल सेंटर फॉर साइंटिफिक रिसर्च ने कुछ दिन पहले ही अपनी इस स्टडी पर बात करते हुए कहा कि चींटियां इस मामले में डॉग्स से बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं.
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