06 Sep 2024
लैटिन भाषा में कहावत है 'इन विनो वेरितास' यानी वाइन में सच छिपा है. इसके बाद ही यह बात आगे बढ़ी कि शराब पीने के बाद लोग सच बोलते हैं. क्या सच में ऐसा है?
रोम के साइंटिस्ट, इतिहासकार और सैनिक प्लीनी द एल्डर ने कहा था कि शराब में सच छिपा होता है. ये आधुनिक इतिहास की बात है.
वैसे ये बात उसके पहले भी किसी न किसी सभ्यता में मिल जाएगी. लेकिन शराब पीने के बाद जो बातें लोग बोलते हैं, क्या वो सच बोल रहे होते हैं. जैसे- तू मेरा भाई है, मैं तेरे लिए जान दे दूंगा...
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑन अल्कोहल अब्यूज एंड अल्कोलिज्म एपिडेमियोलॉजी और बायोमेट्री ब्रांच के प्रमुख ऐरोन व्हाइट इस बात को मानते हैं कि शराब पीने के बाद आदमी वही बोलता है, जो उसके दिमाग में होता है.
ऐरोन कहते हैं कि कुछ मामलों में ये बातें सच भी हो सकती हैं. ये भी हो सकता है कि कुछ लोग उस बात को सच मान लें. जबकि बोलने वाले का इरादा ही ऐसा न हो.
जितनी भी स्टडीज हुई हैं, उसमें ये बात तो सामने आई है कि सच बोले या न बोले. लेकिन शराब पीने वाला नशे में ज्यादा मुखर हो जाता है. वो वही बात बोलता है जो उसके दिमाग में चल रहा होता है. इसलिए लोग शराब को 'Truth Serum' भी कहते हैं.