कई बड़े लोग जो क्रिएटिव होते हैं, वो कहते हैं कि अपनी कला या रचना या प्रयोग से पहले वो ड्रग्स या शराब पीते हैं. इससे वो क्रिएटिव हो जाते हैं. पर ऐसा नहीं है.
वैज्ञानिकों ने अभी एक स्टडी की है, जिसमें यह बात स्पष्ट हो गई है कि ड्रग्स और शराब किसी को क्रिएटिव नहीं बनाती. न ही क्रिएटिविटी में मदद करती है.
वैज्ञानिकों ने बताया है कि क्रिएटिविटी में घूमना, ध्यान लगाना, एक्सरसाइज, ट्रेनिंग जैसी चीजें कारगर हैं. इसलिए इनपर ध्यान देना चाहिए ताकि क्रिएटिव हो सकें.
यूनिवर्सिटी ऑफ एसेक्स में साइकोलॉजी के प्रो. पॉल हैनेल ने कहा कि ड्रग्स और शराब का क्रिएटिविटी से कोई लेना-देना नहीं है. इससे कोई फायदा नहीं होता.
कई बार ऐसी खबरें आती हैं कि सफल लोग अपनी क्रिएटिविटी के पीछे ड्रग्स और शराब को वजह बताते हैं. लेकिन प्रो. हैनेल के हिसाब से ये सही नहीं है.
प्रो. हैनेल और उनकी टीम ने कई स्टडी पेपर्स पढ़े. फिर ऐसे लोगों से बातें की जो क्रिएटिव काम करते हैं. उनपर टेस्ट किए. पर ड्रग्स-शराब का क्रिएटिविटी पर असर नहीं दिखा.
प्रो. हैनेल कहते हैं कि कोई आइडिया जब जेनरेट होता है, तो उसके पीछे कोई सोच, बात, घटना या नजारा होता है. न कि ड्रग्स या शराब.
ड्रग्स और शराब का इस्तेमाल करना सेहत के लिए नुकसानदेह है. वो हमेशा नुकसानदेह ही रहेगा. इससे आपका ब्रेन डैमेज होता है.
हैनेल ने ये माना कि हो सकता है कि आप किसी नशे में कोई अच्छी पेंटिंग बना सकते हैं, क्योंकि वैसे ख्याल आपके दिमाग में आ रहे हैं. लेकिन नशे का ब्रेन पर गलत असर होता है.
कई बार ये इंसान की इंटेलिजेंस और ऑब्जरवेशन पर निर्भर करता है कि वो कितना क्रिएटिव हो सकता है. कई लोग काम से ब्रेक लेकर अपनी क्रिएटिविटी बढ़ाते हैं.
ड्रग्स और शराब को अक्सर समाज में सेलिब्रेट किया जाता है. लेकिन शारीरिक और मानसिक रूप से आपको नुकसान ही पहुंचाता है.
गांजा और भांग लेने वाले लोग भी यह दावा करते हैं कि वो इसे लेने के बाद क्रिएटिव हो जाते हैं. लेकिन असल में वो एक हैल्युशिनेशन के दौर में रहते हैं. दुनिया से अलग.