गगनयान की धरती पर लैंडिंग के बाद उसे समुद्र से रिकवर करने के लिए भारतीय नौसेना और इसरो ने कोच्चि स्थित वाटर सर्वाइवल टेस्ट फैसिलिटी में एक टेस्ट किया.
इस टेस्ट में तेज लहरों में गगनयान के क्रू मॉड्यूल को तैरने के लिए छोड़ दिया गया. ताकि उसके तैरने की क्षमता को जांचा जा सके.
क्रू मॉड्यूल रिकवरी मॉडल (CMRM) की टेस्टिंग के दौरान उसका वजन, सेंटर ऑफ ग्रैविटी, बाहरी ढांचे आदि की जांच की गई.
बता दें कि इसके अंदर ही भारतीय अंतरिक्ष यात्री यानी गगननॉट्स बैठकर धरती के चारों तरफ 400 किलोमीटर की ऊंचाई वाली निचली कक्षा में चक्कर लगाएंगे.
क्रू मॉड्यूल डबल दीवार वाला अत्याधुनिक केबिन है, जिसमें कई प्रकार के नेविगेशन सिस्टम, हेल्थ सिस्टम, फूड हीटर, फूड स्टोरेज, टॉयलेट आदि सब होंगे.
क्रू मॉड्यूल के अंदर का हिस्सा लाइफ सपोर्ट सिस्टम से युक्त होगा. यह उच्च और निम्न तापमान को बर्दाश्त करेगा. साथ ही अंतरिक्ष के रेडिएशन से गगननॉट्स को बचाएगा.
वायुमंडल से बाहर जाते समय और आते समय इसके अंदर बैठे हुए अंतरिक्षयात्रियों को किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होगी.
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