गोल्डेन ब्लड उन लोगों के शरीर में होता है, जिनका Rh फैक्टर null होता है.
इस तरह के खून वाले लोगों के Rh सिस्टम में 61 संभावित एंटीजन की कमी होती है.
Pic Credit: imouniroy Instagramइसलिए इस खून के प्रकार के साथ जीने वालों की जिंदगी हमेशा तलवार की धार पर चलती है.
Pic Credit: imouniroy Instagramबिगथिंक डॉट कॉम के मुताबिक गोल्डेन ब्लड दुनिया में सिर्फ 43 लोगों के शरीर में मौजूद है.
Pic Credit: imouniroy Instagramइसके बारे में पहली बार साल 1961 में पता चला था. जब एक स्थानीय ऑस्ट्रेलियन गर्भवती महिला के खून की जांच की गई थी.
Pic Credit: imouniroy Instagramयह खून किसी के शरीर में न तो चढ़ाया जा सकता है, न ही ये किसी सामान्य ब्लड ग्रुप से बदला जा सकता है.
Pic Credit: imouniroy Instagramगोल्डेन ब्लड के साथ जीना मुश्किल तो है लेकिन यह चिकित्सा विज्ञान यानी मेडिकल साइंस के लिए बहुत जरूरी है.
Pic Credit: imouniroy Instagramअगर किसी Rh-null वाले को खून की जरूरत होती है, उसका दानदाता खोजना मुश्किल है.
Pic Credit: imouniroy Instagramसाथ ही यह खून ऐसा है कि इंटरनेशनल लेवल पर ट्रांसपोर्ट करना भी मुश्किल है.
Pic Credit: imouniroy Instagramइसलिए इस खून के साथ जीने वाले लोग समय-समय पर अपने खून का दान करते रहते हैं. ताकि वह बैंक में जमा रहे.
Pic Credit: imouniroy Instagramइसे किसी और को नहीं दिया जाता. जरूरत पड़ने पर वह खुद ही उस ब्लड का उपयोग कर सकते हैं.
Pic Credit: imouniroy Instagram