10 July 2024
Credit: GSI
पिछले साल जिस तरह उत्तराखंड के खूबसूरत शहर जोशीमठ में दरारें आई थीं. उसी तरह हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले के लिंडूर गांव की जमीनों में दरारे आ गई हैं.
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लिंडूर गांव ग्रेट हिमालय रेंज के बीच में है. यह गांव जिस जगह पर बसा है, वह असल में एक प्राचीन मिट्टी और डेबरी का ढेर है, जो 10,800 फीट की ऊंचाई पर है.
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यह गांव स्टेट हाइवे 26 के पास है. इस गांव में पिछले साल जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया और आईआईटी मंडी की टीम ने स्टडी भी थी. गांव के 14 में से 7 घरों में दरारें आई थीं.
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GSI ने रिपोर्ट में कहा गया था कि इस गांव को तुरंत रीलोकेट करने की जरूरत है. क्योंकि गांव के ठीक ऊपर 5 कुहलों में रिसाव होने से गांव में दरारें आ रही हैं.
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इस गांव के साथ बहने वाले जाहलमा नाले में लगातार हो रहे भूमि कटाव की वजह से भी जमीन खिसक रही है. जाहलमा नाला चंद्रभागा नदी की शाखा है.
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ज्यादातर दरारें नाला के आसपास पाई गईं. गांव उत्तर-पूर्व में ऊंचाई पर ग्लेशियर का मुंह है. जिसका पानी पिघल-पिघल कर गांव तक अलग-अलग नालों से आता है.
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गांव में पानी की सप्लाई के लिए नालियां बनाई गई हैं, जिनसे ग्लेशियर का पानी बहता है. यहां की मिट्टी नरम है.
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यानी ज्यादा बारिश हुई तो पानी के बहाव की वजह से दरारें बढ़ सकती हैं. बड़े स्तर का खतरनाक भूस्खलन हो सकता है. इससे गांव के धंसने का खतरा बना रहेगा.
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