मंगलवार दोपहर दिल्ली-NCR और आसपास के इलाकों में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए. रिक्टर स्केल पर इस भूकंप की तीव्रता 5.8 थी.
भूकंप की तीव्रता नापने के लिए रिक्टर पैमाने का इस्तेमाल होता है. इसकी खोज अमेरिकी वैज्ञानिक चार्ल्स रिक्टर और बेनो गुटरबर्ग ने 1935 में की थी.
रिक्टर स्केल मूल रूप से किसी भूकंप के परिमाण को मापने के लिए तैयार किया गया था. विचार था कि भूकंप की तीव्रता को एक संख्या में व्यक्त किया.
0 से 1.9 रिक्टर स्केल पर भूकंप हल्का होता है और सिर्फ सीज्मोग्राफ से ही पता चलता है. वहीं, 2 से 2.9 रिक्टर स्केल पर भूकंप आने पर हल्का कंपन महसूस होता है.
3 से 3.9 रिक्टर स्केल पर भूकंप आने पर कोई ट्रक आपके नजदीक से गुजर जाए, ऐसा असर होता है. 4 से 4.9 रिक्टर स्केल पर भूकंप आने पर घरों की खिड़कियां टूट सकती हैं.
5 से 5.9 रिक्टर स्केल पर भूकंप आने पर फर्नीचर और बड़े सामान तक हिल सकते हैं. 6 से 6.9 पर इमारतों की नींव दरक सकती है. ऊपरी मंजिलों को नुकसान हो सकता है.
7 से 7.9 रिक्टर स्केल पर भूकंप आने पर इमारतें गिर जाती हैं. जमीन के अंदर पाइप फट जाते हैं. 8 से 8.9 रिक्टर स्केल पर भूकंप आने पर इमारतों सहित बड़े पुल भी गिर जाते हैं.
9 और उससे ज्यादा रिक्टर स्केल पर भूकंप आने पर पूरी तबाही मच सकती है. कोई मैदान में खड़ा हो तो उसे जमीन लहराती हुए दिखेगी. समंदर नजदीक हो तो सुनामी आ जाएगी.