देश का 80% हिस्सा एक्ट्रीम वेदर का शिकार, 12 साल बाद आएगी भयंकर तबाही

13 August 2024

Credit: PTI/AP

IPE Global और ESRI India ने एक संयुक्त रिपोर्ट जारी की है. इसमें बताया है कि कैसे हमारा देश चरम गर्मी और चरम बारिश की मार बर्दाश्त कर रहा है.

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जो स्थिति अभी चल रही है, उसके हिसाब से 2036 तक यानी मात्र 12 साल में हर दस में से आठ भारतीय चरम मौसमी आपदाओं का शिकार होगा.

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अपने देश के 84% जिलों में एक्सट्रीम गर्मी पड़ रही है. 70% जिलों में चरम बारिश हो रही है.

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हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मेघालय और मणिपुर में अत्यधिक गर्मी और बेहद घातक बारिश हो रही है. यानी दोहरी मार झेल रहे हैं ये राज्य. 

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यह स्टडी 1993 से 2022 के आंकड़ों पर बनाई गई है. इतने वर्षों में गर्मी, बारिश की फ्रिक्वेंसी, तीव्रता और असंतुलन में बढ़ोतरी हुई है. 

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इन तीन दशकों में मार्च से लेकर सितंबर तक एक्सट्रीम हीटवेव वाले दिनों में 15 गुना बढोत्तरी हुई है. तटीय क्षेत्रों में सबसे ज्यादा गर्मी- गुजरात, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, ओडिशा और महाराष्ट्र पड़ रही है.

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भविष्य में इसका प्रभाव और ज्यादा होगा. अक्तूबर से दिसंबर तक 62% से अधिक हीटवेव प्रभावित भारतीय जिले अनियमित और अत्यधिक वर्षा का सामना कर रहे हैं.

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जलवायु परिवर्तन की वजह से ही भविष्य और खतरनाक होने वाला है. इससे लोगों की कमाई और बुनियादी ढांचे पर भी असर पड़ेगा.

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