मंगल से शनि, किस ग्रह पर कितना जिएंगे आप? जानिए
क्या धरती के अलावा दूसरे ग्रहों पर जीवित रह सकते हैं आप?
अगर किसी दूसरे ग्रह से तुलना करें तो धरती पर जीवन सबसे बेहतर है.
अमेरिकी खगोल वैज्ञानिक नील डीग्रेसे के मुताबिक, सौर मंडल में कहीं भी जाने के लिए स्पेससूट सबसे जरूरी है.
अंतरिक्ष में बिना स्पेससूट के कहीं भी जाना घातक होगा.
बता दें, पृथ्वी के अलावा कोई भी ऐसी जगह नहीं है, जहां आप दो मिनट से ज्यादा जीवित रह सकें.
सूर्य एक सेकंड के हर 15 लाखवें हिस्से में इतनी ऊर्जा छोड़ता है, जितनी पृथ्वी को पूरे एक साल के लिए पर्याप्त होगी.
ऐसे में सूर्य के पास जाने पर आप वाष्प बन जाएंगे. यहां कोई जाए तो पलक झपकते ही उसकी मौत हो जाएगी.
बुध ग्रह सूर्य के सामने होता है, वह बेहद गर्म ((800 ºF / 427ºC) होता है.
जबकि बुध का पिछला पक्ष बर्फ से जमा (तापमान शून्य -179 डिग्री) हुआ है.
अगर आप दोनों तापमानों के बीच की रेखा पर जाते हैं, तो आप तब तक जीवित रह सकते हैं.
जब तक आप अपनी सांस रोक सकें. यानी यहां आप करीब दो मिनट तक जिंदा रह सकते हैं.
शुक्र ग्रह का तापमान भी 900 डिग्री F है. इसलिए यहां भी इंसान का हाल सूर्य पर जाने जैसा ही होगा.
टायसन कहते हैं कि मंगल ग्रह बहुत ठंडा है, लेकिन वहां हवा बहुत पतली है.
इसलिए ठंड की तीव्रता उतनी नहीं होगी जितनी उस तापमान पर, पृथ्वी पर महसूस होती है.
यहां भी आप उतनी ही देर तक रह सकते हैं, जितनी देर तक अपनी सांस रोक सकें.
बृहस्पति ग्रह पर कई तरह की गैस हैं. लेकिन ऑक्सीजन नहीं है.
खास बात यह है कि इस ग्रह की कोई ठोस सतह नहीं है, जहां कोई चीज टिक सके.
यहां गैसों के दबाव में ही इंसान की मौत हो जाएगी. यहां भी एक सेकंड से ज्यादा रुका नहीं जा सकता.
बृहस्पति की ही तरह, शनि, यूरेनस और नेप्च्यून गैस के गोले हैं.
कोई यहां जाएगा तो गैसों के दबाव की वजह से जिंदा नहीं बच पाएगा.