क्या आपने कभी सोचा है कि दूध उबलकर बर्तन से बाहर क्यों आ जाता है? जबकि पानी के साथ ऐसा नहीं होता.
पानी बॉयलिंग स्टेज पर आकर बर्तन में ही उबलता रहता है और बाहर आकर नहीं गिरता है.
दूध में फैट, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन और कई तरह के खनिज होते हैं. मुख्य रूप से दूध में वसा के अणु शामिल होते हैं और प्रोटीन के रूप मे केसीन के अणु पाएं जाते हैं.
चूंकि दूध में ज्यादा मात्रा में पानी होता है और जब ये गर्म होता है तो भाप के रूप में बदलना शुरू हो जाता है. इससे फैट, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट गाढ़े होने शुरू हो जाते हैं.
दूध का फैट, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, खनिज वजन में हल्के होते हैं. गर्म होते ही ये दूध के ऊपर तैरने लगते हैं. इनकी परत नीचे की भाप को बाहर निकलने नहीं देती.
लेकिन आमतौर पर प्रबल वही होता है, जिसके पास तादाद ज्यादा हो. पानी का ज्यादा प्रतिशत होने से पानी ऊपरी परत को अपने रास्ते से हटाकर भाप को बाहर निकालता है.
अब सवाल है कि पानी उबलकर क्यों नहीं गिरता. इसमें फैट, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन नहीं होता जो उसके ऊपर परत बनाए और भाप को निकलने को जगह की जरूरत हो.
इस प्रक्रिया में ऊपरी परत बर्तन से बाहर निकल जाती है और बचा हुआ दूध बर्तन में ही उबलता रहता है. यकीनन अब आपको दूध के बाहर गिरने की वजह समझ आ गई होगी.
उबलते पानी में भाप को बाहर निकलने के लिए बाधा नहीं होती, इसलिए वो बर्तन में ही उबलता रहता है.