इंसानों के लिए कितना खतरा बनेंगे 2022 में ढूंढे गए ये वायरस?
जॉम्बी वायरस: यह वायरस 48,500 साल पहले मर गया था. साइबेरिया में वैज्ञानिकों ने उसे जिंदा कर दिया. इसे जॉम्बी वायरस नाम दिया गया. यह वायरस अमीबा को संक्रमित कर चुका है.
HSV-1: कोल्ड सोर्स करने वाला हर्पीस सिम्प्लेक्स वायरस 1. कुछ रिसर्चर्स का मानना है कि यह चुंबन यानी किस से फैलता है. हर्पीस वायरस ब्रॉन्ज एज के समय भी था.
नॉर्स गॉड्स वायरस: ज्ञानिकों ने ऐसे रहस्यमयी वायरसों के समूह का जेनेटिक अंश खोजा है. इस वायरस का नाम नॉर्स माइथोलॉजी पर रखा गया है.
Mono Virus: मोनो यानी मल्टिपल स्क्लेरोसिस जैसी ऑटोइम्यून डिजीस पैदा करने वाला वायरस. इसे एपस्टीन-बर्र वायरस भी कहते हैं. यह सीधे दिमाग और रीढ़ की हड्डी पर हमला करता है.
Giant Virus in Arctic Lake:ये उत्तरी ध्रुव से 800 किलोमीटर दूर द मिलने फियोर्ड एपिशेल्फ झील में मिले हैं. ये आकार में बड़े हैं. ये भविष्य में बड़ा खतरा बन सकते हैं.
Viruses Infect Bacterias: ये बैक्टीरिया को संक्रमित करके खा जाते हैं. इनसे प्रभावी एंटीबायोटिक बन सकते हैं. यह इकलौता ऐसा वायरस है, जो इंसानों के लिए फायदेमंद हो सकता है.
इंसानों के शरीर में वायरस: इंसानी जीनोम में प्राचीन वायरस के अंश मिले हैं. इन्हें जंक डीएनए कहते हैं. हमेशा हमारे ऊतकों के बीच घूमते हैं. हर ऊतक पर इनका अलग असर होता है.
टोरोवायरस: इस साल वैज्ञानिकों ने आरएनए प्रजाति के करीब 5500 वायरसों की खोज की है. टोरोवायरस इसी में से एक है. ये किस तरह से नुकसान पहुंचा सकता है, ये फिलहाल नहीं पता.
अरेनावायरस: दुनिया भर के समुद्रों में RNA वायरसों की खोज हुई है. इसमें से एक है अरेनावायरस. ये रहस्यमयी वायरस समुद्र में कार्बन डाईऑक्साइड के बहाव को प्रभावित कर सकता है.
ब्लैक लेग्ड टिक: पेंसिलवेनिया के लॉरेंस टाउनशिप रीक्रिएशनल पार्क में काले पैरों वाले टिक बढ़ गए. इनके अंदर जान लेने वाला वायरस होता है. जिसे डीयर-टिक वायरस नाम दिया गया है.