कुछ लोग नींद में बातें क्यों करते हैं... क्या है इसकी वजह?

By: ऋचीक मिश्रा

March 03, 2023

दुनिया की करीब दो-तिहाई आबादी अपने जीवन में कम से कम एक बार नींद में बात तो करती ही है. इसे Sleep Talking कहते हैं.

नींद में बात करना कोई बीमारी नहीं है. बल्कि यह इंसान के सोने के तरीके का अंतर बताता है. यानी हर इंसान अलग तरह से बात करता है.

नींद में बात करने और नाक बजाने वालों को हिप्नागोगिक जर्क्स (Hynagogic Jerks) कहते हैं. कई बार ये डरावना हो जाता है.

नींद में बात करने वालों से सबसे ज्यादा दिक्कत उन्हें होती है जो उनका बिस्तर शेयर करते हैं या फिर उनका कमरा.

इसे साइंटिफिक भाषा में सोम्नीलोक्वी (Somniloquy) कहते हैं. इसमें इंसान सोते समय एकाध शब्द या पूरा वाक्य बोलता है.

नींद में कुछ लोग बुदबुदाते हैं. कुछ लोग चिल्लाते हैं. कुछ लोग अपने प्रिय लोगों का नाम लेते हैं. कुछ गालियां देते हैं. कुछ लोग हंसते हैं.

आमतौर पर ये काम बच्चे करते हैं. लेकिन वयस्क भी करते हैं. वैसे ये साल में एक या दो बार होने वाली प्रक्रिया है. लेकिन कुछ लोग ज्यादा करते हैं.

नींद में बात करने की वजह है तनाव, नींद का पूरा न होना, किसी चीज की ज्यादा इच्छा जो पूरी न हो रही हो या फिर किसी की कमी खलना.

कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि नींद में जो बातें निकलती हैं, कई बार वो घटनाएं सच होती हैं. कई बार काल्पनिक. रहस्य भी खुलते हैं.

कुछ लोगों को तो ये भी याद रखते हैं कि उन्होंने सपने में किससे बात की. क्या घटना हुई. किससे बात की. बात पुरानी है या भविष्य की.

नींद में बात तब करते हैं जब नॉन-रैपिड आई मूवमेंट की स्थिति होती है. रैपिड आई मूवमेंट वाली नींद में लोग बात नहीं करते.

सही मायने में वैज्ञानिकों को अब तक नहीं पता चला है कि नींद में लोग बातें क्यों करते हैं?