आप अक्सर ऐसी खबरें पढ़ते या सुनते होंगे जहां कहा जाता होगा कि आनेवाले सालों में पानी की भारी कमी होने वाली है.
ऐसे में क्या आपके मन में कभी सवाल आया है कि जब धरती पर मौजूद समुद्र में इतना पानी है, तो हम उसे पी क्यों नहीं सकते?
धरती का 71 प्रतिशत हिस्सा पानी है, लेकिन केवल 3.5 प्रतिशत पानी ही पीने योग्य है. आइए जानते हैं क्या होगा अगर हम समुद्र का पानी पीने लगें.
समुद्र के पानी में इतना नमक होता है कि वो पीने योग्य नहीं होता. समुद्र का पानी अगर ज्यादा मात्रा में पिया जाए तो ये जानलेवा भी साबित हो सकता है.
लाइव साइंस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, समुद्री जल के वजन का लगभग 3.5% उसमें मौजूद नमक से आता है. पानी में इतना ज्यादा नमक ही, उसे पीने योग्य नहीं बनाता.
समुद्री पानी में नमक की मात्रा बहुत ज्यादा होती है. इतनी ज्यादा कि इसे इंसानी कोशिकाओं तक सुरक्षित तरीके से साफ करके पहुंचाना भी मुश्किल है. इंसानी कोशिकाओं को पानी अपेक्षाकृत ज्यादा शुद्ध रूप में चाहिए होता है.
जब आप बहुत ज्यादा खारा पानी पी लेते हैं, तब आपकी बॉडी में बहुत ज्यादा नमक पहुंच जाता है, जिसे बॉडी यूरीन के रूप में बाहर निकालना चाहती है.
आपकी किडनियां अशुद्धताओं को पानी में मिलाकर ब्लैडर तक भेजती हैं, फिर ब्लैडर से अशुद्धताएं यूरीन के रूप में बाहर निकलती हैं.
हालांकि, किडनी तभी यूरीन बना सकती है, जब पानी में नमक की मात्रा हमारे ब्लड में मिलने वाले नमक से कम हो. वहीं, समुद्र के पानी में नमक की मात्रा मानव रक्त में मौजूद नमक की मात्रा से तीन गुना अधिक होती है.
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, समुद्री जल पीने के कारण आपकी बॉडी में जो अतिरिक्त नमक पहुंचेगा, उससे छुटकारा पाने के लिए, आपने जितना पानी पिया है उससे अधिक आपको यूरिनेट करना होगा.
इस कारण से आपकी बॉडी डिहाइड्रेट हो सकती है और आपकी जान भी जा सकती है.