भारी बारिश, लैंडस्लाइड, बर्बादी... आखिर क्यों केरल में हर साल मचती है तबाही?

31 July 2024

Credit: Reuters

केरल के वायनाड में 30 जुलाई 2024 को पहाड़ से बहकर आए सैलाब ने करीब 22 हजार की आबादी वाले 4 गांव को तबाह कर दिया. सैकड़ों लोग मलबे में दब गए.

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लगभग 156 लोगों की मौत होने की खबर है और लगभग 100 लोग लापता हैं. वायनाड अकेला जिला नहीं भूस्खलन झेलने वाला. कोट्टायम, इडुकी जैसे जिले भी इस समस्या से परेशान हैं.

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जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की साल 2021 की स्टडी के मुताबिक केरल के पूरे क्षेत्रफल का 43 फीसदी हिस्सा भूस्खलन संभावित क्षेत्र है.

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1848 वर्ग किलोमीटर के केरल में सबसे ज्यादा ढलानी इलाका पश्चिमी घाट में हैं. इडुकी की 74 फीसदी और वायनाड की 51 फीसदी जमीन पहाड़ी ढलानें हैं. यानी भूस्खलन की आशंका बहुत ज्यादा रहती है.

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पहले केरल में ऐसी घटनाएं कम होती थी. लेकिन कुछ वर्षों से यह तेजी से बढ़ी हैं.  साल 2019 में कुल मिलाकर केरल के आठ जिलों ने 80 भूस्खलन की घटनाएं देखी थीं.

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जलवायु परिवर्तन की वजह से बारिश का पैटर्न भी बदल गया है. जंगल की कटाई, भौगोलिक स्थिति, मिट्टी की गुणवत्ता इसके कारण हो सकते हैं.

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करीब एक दशक पहले नेशनल सेंटर फॉर अर्थ स्टडीज ने एक हजार्ड जोन का का नक्शा बनाया था. सुरक्षित इलाके अब खतरनाक हो चुके हैं. वायनाड में अब तक हुआ सबसे बड़ा भूस्खलन बताया जा रहा है.

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