ब्रिटिश साइकोलॉजिस्ट रॉबिन डन्बर ने नब्बे के दशक में एक थ्योरी दी, जो दिमाग के साइज और औसत सोशल ग्रुप साइज की बात करती थी.
थ्योरी के मुताबिक, जिनका ब्रेन जितना विकसित होता है, उनके रिश्ते उतने ही ज्यादा बनते हैं. इस लिहाज से इंसानों के हिस्से सबसे ज्यादा रिश्ते आए.
कम कॉग्निटिव स्किल वाले पशु-पक्षी उतने दोस्ताना नहीं दिखे. थ्योरी के मुताबिक, इंसान पूरी जिंदगी में ज्यादा से ज्यादा 150 लोगों से ही जुड़ता है.
हमारे सबसे टाइटेस्ट सर्कल में 1.5 से लेकर 5 ही लोग होते हैं. यही वे लोग होते हैं, जिनके भले-बुरे या होने- न होने से हमें ज्यादा फर्क पड़ता है.
इसके बाद 15 वे लोग होते हैं, जिन्हें हम गुड फ्रेंड्स की श्रेणी में रखते हैं. ये रिश्तेदार भी हो सकते हैं या पड़ोसी भी.
अब 50 लोग आते हैं, जो दोस्त की तरह लगते हैं. इसके बाद बाद के लोग मीनिंगफुल कॉन्टेक्ट होते हैं. रिश्तों पर बाकी डिटेल्स नीचे जानें.