21 OCT 2024
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साइबर फ्रॉड के कई मामलों में आपने पाया होगा कि स्कैमर्स Skype का इस्तेमाल करते हैं. लोगों को फंसाने के लिए फ्रॉड्स उनसे ये ऐप डाउनलोड करवाते है, लेकिन क्यों?
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Skype पर अकाउंट बनाने के लिए ज्यादा जानकारी नहीं देनी पड़ती. स्कैमर्स नकली पहचान और गलत जानकारी वाला अकाउंट बनाकर लोगों को धोखा देते हैं.
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Skype दुनिया भर में इस्तेमाल होता है और ये फ्री है. यानी स्कैमर्स को बड़ा नेवटर्क मिलता है. इस ऐप को आसानी से डाउनलोड किया जा सकता है, जिसमें स्कैमर्स को कई फीचर्स भी मिलते हैं.
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Skype पर वीडियो या वॉयस कॉल का ऑप्शन मिलता है. लोगों को फंसाने के लिए स्कैमर्स फर्जी वीडियो, बैकग्राउंड एडिट करके लोगों को आसानी से फंसा पाते हैं.
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Skype पर फाइल शेयरिंग का ऑप्शन मिलता है. स्कैमर्स इसका इस्तेमाल करके आपके सिस्टम में किसी मिसलेनियस फाइल को ट्रांसफर कर सकते हैं.
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इस प्लेटफॉर्म पर आपको स्क्रीन शेयरिंग का विकल्प मिलता है. इसकी मदद से स्कैमर्स आपके सिस्टम का एक्सेस आसानी से हासिल कर सकते हैं.
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Skype का इस्तेमाल VPN के जरिए किया जा सकता है. इससे स्कैमर्स की लोकेशन ट्रैक कर पाना असंभव हो जाता है और लोगों को आसानी से शिकार बनाया जा सकता है.
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स्कैमर्स Skype चैट के दौरान गिफ्ट कार्ड या क्रिप्टोकरेंसी जैसी अनट्रेसेबल पेमेंट मांग सकते हैं, वो आपको तुरंत पेमेंट करने के लिए मजबूर भी कर सकते हैं.
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ऐसा नहीं है कि ये प्लेटफॉर्म खतरनाक है. डिजिटल वर्ल्ड में कोई भी प्लेटफॉर्म असुरक्षित हो सकता है, इसलिए आपको इसे इस्तेमाल करते हुए सावधान रहना चाहिए.
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किसी भी अनजान शख्स से Skype पर ना जुड़े. अगर कोई आपको कॉल करके डिजिटल अरेस्ट या डिजिटल कोर्ट जैसी बातें कहता है, तो उसकी बातों में ना आएं.
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स्कैमर्स कई लोगों को फंसाने के लिए डिजिटल अरेस्ट और डिजिटल कोर्ट जैसे टर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं. इसमें Skype के जरिए लोगों की फर्जी पेशी भी करवाई जाती है.
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