08 February 2025
अमेरिका के अलबामा में चौथी बार नाइट्रोजन गैस से 7 फरवरी को एक शख्स को मौत की सजा दी गई. इससे पहले तीन और लोगों को इसी तरीके से यहां मृत्युदंड दिया जा चुका है.
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52 वर्षीय आरोपी डेमेट्रियस टेरेंस फ्रेजियर को रेप और हत्या के आरोप में मौत की सजा सुनाई गई थी. इसके बाद नाइट्रोजन गैस से मृत्युदंड देने का फैसला किया गया.
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अमेरिकी इतिहास में पहली बार 25 जनवरी को मौत की सजा केनेथ यूगिन स्मिथ नाम के कैदी को नाइट्रोजन गैस के जरिए मौत की सजा दी गई थी.
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उस वक्त मौत की सजा के लिए इस तरीके का इस्तेमाल करने पर काफी विवाद हुआ था. इसे ज्यादा दर्दनाक तरीका बताया गया था.
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अब सवाल ये उठता है कि क्या सचमुच में नाइट्रोजन गैस से मौत फांसी से ज्यादा दर्दनाक है? इन दोनों ही तरीकों में इंसान की कितने देर में मौत हो जाती है?
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कैदी को मास्क लगाकर उसके अंदर नाइट्रोजन गैस भर दी जाती है. मास्क के जरिए कम से कम 15 मिनट तक उसे नाइट्रोजन दी जाती है.
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मास्क लगे होने की वजह से उसे ऑक्सीजन नहीं मिलती है और नाइट्रोजन सीधे उसके शरीर के अंदर चली जाती है.
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नाइट्रोजन गैस की वजह से कुछ सेकंड में कैदी बेहोश हो जाता है और कुछ मिनटों में ही उसकी मौत हो जाती है.
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वहीं फांसी देने के बाद जब रस्सी से मुजरिम की गर्दन जकड़ जाती है, तो वह धीरे-धीरे वह मर जाता है.
फांसी देने के बाद कैदी को आधे घंटे तक लटकता हुआ छोड़ दिया जाता है. क्योंकि इतने देर में किसी की भी सांसें पूरी तरह से रुक जाती है.
आधे घंटे के बाद डॉक्टर बॉडी की जांच करता है. इसके बाद उसे मरा हुआ घोषित कर देता है.