फ्लाइट में फ्री वाई-फाई कहां से आता है, क्यों नहीं काम करता मोबाइल डेटा?

04 January 2025

कुछ एयरलाइंस अपनी फ्लाइट्स में फ्री वाई-फाई की सुविधा देते हैं. एयर इंडिया ने भी फ्री वाई-फाई देने की सेवा कुछ उड़ानों में शुरू की है. अब सवाल ये उठता है कि हवा में इतनी ऊंचाई पर प्लेन में वाई-फाई कैसे काम करता है.

Credit: Pexels

हवाई यात्रा के दौरान प्लेन में इंटरनेट की सुविधा दो प्रमुख तकनीकों पर आधारित होती है. एक होता है एयर-टू-ग्राउंड सिस्टम और दूसरा होता है सैटेलाइट बेस्ड वाई-फाई सिस्टम.

Credit: Pexels

एयर-टू-ग्राउंड सिस्टम के तहत विमान में लगा एंटीना नजदीकी जमीन पर मौजूद टावर से सिग्नल प्राप्त करता है. एक निश्चित ऊंचाई तक यह कनेक्शन सुचारू रूप से चलता रहता है.

Credit: Pexels

अगर विमान किसी ऐसे क्षेत्र से गुजरता है जहां ग्राउंड टावर नहीं हैं, तो कनेक्शन बाधित हो सकता है.

Credit: Pexels

ग्राउंड टावर सिग्नल को ऊपर की ओर प्रोजेक्ट करते हैं. इस प्रणाली में इस्तेमाल होने वाली एंटीना विमान के निचले हिस्से में फिट की जाती है.

Credit: Pexels

दूसरा होता है सैटेलाइट आधारित वाई-फाई सिस्टम. यह तकनीक आजकल ज्यादा पॉपुलर है.

Credit: Pexels

इसमें जमीन पर स्थित स्टेशन से सैटेलाइट के माध्यम से सिग्नल विमान तक पहुंचते हैं. इस प्रणाली में विमान के ऊपर एंटीना लगे होते हैं.

Credit: Pexels

यह तकनीक उन क्षेत्रों में कनेक्टिविटी प्रदान करने में अधिक उपयोगी है जहां ग्राउंड टावर नहीं हैं, जैसे समुद्र के ऊपर.

Credit: Pexels

सिग्नल विमान के अंदर एक राउटर के माध्यम से यात्रियों के डिवाइस तक पहुंचाए जाते हैं. जब विमान 3,000 मीटर की ऊंचाई पर पहुंचता है, तो ऑन-बोर्ड एंटीना सैटेलाइट सेवा से जुड़ जाता है.

Credit: Pexels

वहीं फ्लाइट में मोबाइल डेटा बैन होता है. क्योंकि इनकी तंरगों से पायलट के नेविगेशन और रडार उपकरण, ग्राउंड कंट्रोल से संपर्क, यहां तक कि टकराव से बचाव तकनीक में भी बाधा उत्पन्न होती है.

Credit: Pexels