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विश्व

ISIS-K आतंकियों के छक्के छुड़ाने के लिए अफगानिस्तान में ही रुकेंगे ये फाइटर्स?

SAS Fighrers Afghanistan
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अफगानिस्तान (Afghanistan) के काबुल एयरपोर्ट (Kabul Airport) पर आत्मघाती बम धमाकों (Kabul Suicide Bombings) में 170 से अधिक लोग मारे गए. इन धमाकों के बाद जहां अमेरिका ने ISIS-K के आतंकियों पर ड्रोन हमला (Drone Attack) किया तो वहीं अब ब्रिटिश आर्मी (British Army) की एक टुकड़ी SAS Fighters ने अफगानिस्तान में ही रुकने के लिए इजाजत मांगी है. 

(सभी फोटो- गेटी) 

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द मिरर की एक रिपोर्ट के मुताबिक, काबुल एयरपोर्ट (Kabul Airport Blast) पर मारे गए 13 अमेरिकी सैनिकों की मौत का बदला लेने के लिए ब्रिटिश आर्मी की Special Air Service (SAS) की एक घातक टीम अभी कुछ दिन और अफगानिस्तान में रुक सकती है. 

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सूत्रों का कहना है कि हू डेयर विन्स रेजिमेंट (Who Dares Wins Regiment) के 40 फाइटर्स ने युद्धग्रस्त अफगानिस्तान में रुकने की पेशकश की है, ताकि वे ISIS-K के आतंकियों से लड़ाई को अंजाम तक पहुंचा सकें. 
 

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गौरतलब है कि SAS फाइटर्स द्वारा ये कदम तब उठाया जब ब्रिटेन का आखिरी विमान अपने नागरिकों को लेकर काबुल से उड़ चुका है. हालांकि, 150 ब्रिटिश पासपोर्ट धारक अभी भी शहर में फंसे हुए बताए जा रहे हैं. 
 

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बताया जा रहा है कि SAS फाइटर्स के पूर्वी अफगानिस्तान में स्थित खूंखार ISIS-K के आतंकियों के खिलाफ गुप्त हमले करने के लिए अफगान-पाकिस्तान बॉर्डर में एक आधार स्थापित करने की संभावना है. जिसका उपयोग Royal Navy के SBS विशेष बलों, US Army के डेल्टा फोर्स और US Navy सील्स द्वारा भी किया जाएगा. 

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अफगानिस्तान में इन SAS फाइटर्स को ड्रोन, अमेरिका और संभवतः ब्रिटिश स्ट्राइक विमानों द्वारा सपोर्ट किया जाएगा. हालांकि, इन्हें अफगानिस्तान में काम करने के लिए तालिबान की मंजूरी की आवश्यकता होगी. ऐसे में रक्षा सूत्रों का कहना है कि मंजूरी दिए जाने की पूरी संभावना है. 
 

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ब्रिटिश और अमेरिकी विशेष बलों को उसी तर्ज पर संगठित किया जाएगा जैसे टास्क फोर्स ब्लैक, जो कभी इराक में संचालित होता था. ये स्पेशल फोर्स अफगानिस्तान में अभी अपना काम करती रहेगी, हालांकि इनकी संख्या बेहद कम होगी. 

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गौरतलब है कि अमेरिका, ब्रिटेन और तालिबान अपने साझा दुश्मन इस्लामिक स्टेट-खुरासान प्रांत (ISIS-K)के खात्मे के लिए हाथ मिला सकते हैं. काबुल एयरपोर्ट पर भी ISIS-K के आतंकियों ने ही आत्मघाती हमला किया था. इस हमले का जवाब अमेरिका ने ड्रोन अटैक से दिया, जिसमें बम ब्लास्ट के साजिशकर्ता मारे गए. 

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