पाकिस्तान में चीनी निवेश को लेकर तो पहले से ही चिंताएं जताई जा रही थीं. पाकिस्तान की सरकार दावा करती रही है कि चीन के निवेश से स्थानीय लोगों के लिए नौकरियां पैदा होंगी और उन्हें इसका फायदा मिलेगा. हालांकि, अभी से ही इस दावे की असलियत नजर आने लगी है. पाकिस्तानी अखबार द न्यूज इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में चीन की मदद से शुरू हुई मेट्रो में चीनी स्टाफ को स्थानीय लोगों की तुलना में ज्यादा सैलरी दी जा रही है.
अपने ही देश में भेदभाव का शिकार होने से पाकिस्तानी कर्मचारियों का मनोबल कमजोर पड़ रहा है. जहां, चीनी स्टाफ को युआन में सैलरी दी जा रही है, वहीं स्थानीय लोगों को पाकिस्तानी रुपये में ही भुगतान किया जा रहा है.
द न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, बुधवार को एक चाइनीज युआन की कीमत 24 पाकिस्तानी रुपये के बराबर थी. ऑरेंज लाइन मेट्रो ट्रेन प्रोजेक्ट से जुड़े 93 चीनी कर्मचारियों की सैलरी के डेटा का अध्ययन करने पर पता चलता है कि उन्हें बहुत ज्यादा सैलरी दी जा रही है. अगर एक ही पद पर काम कर रहे पाकिस्तानी कर्मचारियों और चीनी कर्मचारियों की तुलना करें तो पाकिस्तानियों को कुछ भी नहीं मिल रहा है. एक डेटा के मुताबिक, चीनी मूल के डेप्युटी चीफ एग्जेक्यूटिव ऑफिसर/सीएफओ/डायरेक्टर (ग्रेड 2) को प्रति माह 136,000 युआन दिया जा रहा है जो करीब 32 लाख पाकिस्तानी रुपये है. इस ग्रेड में तीन पद थे और तीनों पर चीनी नागरिकों की ही नियुक्ति कर दी गई. इस पद पर किसी भी पाकिस्तान को हायर नहीं किया गया.
डीजीएम रैंक के चीनी अधिकारियों को हर महीने 83,000 युआन दिए जा रहे हैं जो 19 लाख के बराबर है. जबकि डीजीएम एक्विपमेंट ऐंड मेंटिनेंस के पद पर तैनात पाकिस्तानी अधिकारी उमर चिश्ती को सिर्फ 6,25,000 रुपये ही मिलते हैं. द न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, मेट्रो में टेक्नीशियन/ट्रेन ऑपरेटर्स व अन्य पदों पर तैनात 43 चीनी मूल के लोगों को 47,500 युआन यानी 11 लाख का भुगतान किया जा रहा है. हालांकि, पाकिस्तानी ट्रेन ऑपरेटर या ट्रेन क्रू को सिर्फ 60,000 रुपये ही मिलते हैं.
सैलरी में हो रहे इस भेदभाव का एक और उदाहरण देते हुए न्यूज ने बताया कि चीनी मूल के 12 लोगो ट्रेन डिस्पैचर और ट्रेन क्रू के पद पर काम कर रहे हैं जिन्हें 57,000 युआन (13 लाख) प्रति माह का वेतन दिया जा रहा है, वहीं, इन्हीं पदों पर तैनात पाकिस्तानियों को बहुत कम सैलरी मिल रही है.
अपने चीनी सह-कर्मचारियों की सैलरी को देखते हुए पाकिस्तानी कर्मचारियों ने भी सरकार से सैलरी बढ़ाने की मांग की है. वहीं, पंजाब मास ट्रांजिट अथॉरिटी के जनरल मैनेजर उजैर शाह ने कहा कि पाकिस्तानी कर्मचारी अगर पाकिस्तानियों से ही तुलना करें तो उनका मनोबल नहीं गिरेगा. उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी कर्मचारियों और चीनी कर्मचारियों की सैलरी की तुलना बिल्कुल नहीं की जा सकती है.