कोरोना वायरस के मामले दुनिया में लगातार बढ़ रहे हैं. कई देशों को दोबारा नेशनल लॉकडाउन करना पड़ा है. कई देशों में सर्दी का मौसम भी आने वाला है या आ चुका है. ऐसे में कई एक्सपर्ट 1918 की फ्लू महामारी से सीख लेने की अपील करते हैं. आइए जानते हैं कि फ्लू महामारी ने किस तरह दुनियाभर के लोगों को प्रभावित किया था-
1918 में आई फ्लू महामारी को स्पेनिश फ्लू भी कहते हैं. यह A/H1N1 वायरस से पैदा हुई थी. इस महामारी की तीन लहर आई थी. लेकिन बड़ी बात ये है कि पहली लहर तुलनात्मक रूप से कम जानलेवा थी और ज्यादातर मौतें दूसरी लहर के दौरान हुईं. इसी वजह से कोरोना वायरस को लेकर भी कई एक्सपर्ट चेतावनी दे रहे हैं कि अगर लोगों ने सतर्कता नहीं बरती को दूसरी लहर अधिक खतरनाक हो सकती है.
ब्रिटेन, फ्रांस सहित कई देशों में कोरोना के मामले बढ़ने की वजह से दोबारा नेशनल लॉकडाउन का ऐलान कर दिया गया है. दुनिया के कुछ ही देश ऐसे हैं जहां वायरस पर काबू पाया गया है. इसलिए वैश्विक स्तर पर कोरोना का काफी खतरा बना हुआ है. वहीं, एक्सपर्ट्स का कहना है कि कोरोना को लेकर वैज्ञानिकों और लोगों के पास काफी जानकारी उपलब्ध है, लेकिन 1918 की फ्लू महामारी के दौरान ऐसा नहीं था. तब लोग समझ ही नहीं पा रहे थे कि यह महामारी कैसे फैल रही है और कैसे इससे बचा जा सकता है.
1918 की फ्लू महामारी के दौरान दुनियाभर में 5 से 10 करोड़ लोगों की मौतें हो गई थीं. सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, करीब-करीब आधी मौतें 20 से 40 साल के उम्र के लोगों की हुई थीं. महामारी की दो लहर 1918 में और तीसरी लहर 1919 में आई थी. आज तक दुनिया में इस बात पर सहमति नहीं बन सकी है कि फ्लू महामारी किस जगह से शुरू हुई थी. वहीं, फ्लू महामारी ने दुनिया की एक तिहाई आबादी को संक्रमित किया था.