कोरोना वायरस महामारी (Coronavirus Pandemic) से दुनिया बेहाल है. पहली और दूसरी लहर के बाद अब कोरोना की तीसरी लहर (Corona Third Wave) का खतरा मंडरा रहा है. साल 2020 की तरह ही 2021 में भी कई देशों में हजारों लोगों ने जान गंवाई. यूरोपीय देश कोरोना (Corona In European Country) से बुरी तरह प्रभावित हुए. लेकिन इन सबके बीच एक देश ऐसा भी है, जो कोरोना की मार से बचा रहा.
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कोरोना से दुनिया भर में जहां लाखों लोगों ने जान गंवाई, वहीं यूरोप के आइसलैंड में इस साल कोविड के चलते सिर्फ एक मरीज की मौत हुई. शुक्रवार को जारी आंकड़ों से पता चला है कि पूरे आइसलैंड में कोरोना के सिर्फ 60 एक्टिव मामले हैं.
दुनिया में कोरोना के नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक, आइसलैंड ने पिछले छह महीनों में इस महामारी को काफी हद तक काबू कर लिया. अब तक देश में कुल 30 मौतें दर्ज की गईं, जो कि पूरे यूरोप में सबसे कम मृत्यु दर है.
हालांकि, आइसलैंड में अब कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं क्योंकि जून के अंत में लॉकडाउन के प्रतिबंध हटा दिए गए थे. साथ ही दूसरे देशों के साथ जुड़ी सीमाओं को भी खोल दिया गया था.
आइसलैंड में एक्टिव कोविड केसों की संख्या शुक्रवार को बढ़कर 60 हो गई, जो एक सप्ताह पहले 34 थी. शुक्रवार को सात नए मामले सामने आए थे. बता दें कि 360,000 की आबादी वाले आइसलैंड में कुल 6,637 संक्रमण के केस आए थे. इसमें से केवल 30 लोगों की मौत हुई है.
हाल के दिनों यहां कोरोना के नए वैरिएंट का भी पता चला. आइसलैंड में Delta Variant के दो केस सामने आए हैं. हालांकि, अभी ये बड़ी आबादी में नहीं फैला है.
आइसलैंड के अधिकारियों ने शुक्रवार को 49 दिनों बाद पहली COVID-19 ब्रीफिंग आयोजित की. ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि बीते कुछ दिनों से केस बढ़े हैं. गौरतलब है कि यहां अधिकांश लोगों को पूरी तरह से कोरोना का टीका लग चुका है.
आइसलैंड पब्लिक ब्रॉडकास्टर आरयूवी के एक लेख में कहा गया है कि जिस व्यक्ति की मृत्यु इस वर्ष कोरोना के कारण हुई, उसकी उम्र 50 वर्ष थी. 22 मई को अस्पताल में उसकी जान गई थी. हालांकि, आइसलैंड की सरकार ने कहा है कि वह कोई घरेलू प्रतिबंध नहीं लगाएगी, लेकिन आने वाले दिनों में जनता को सावधान रहने की सलाह दी है.