पाकिस्तान ने बुधवार को ये कहकर सनसनी मचा दी कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के पूर्व प्रमुख असद दुर्रानी भारत परस्त हैं. पाकिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि आईएसआई के पूर्व प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) असद दुर्रानी साल 2008 से ही भारत की खुफिया एजेंसी रॉ के संपर्क में हैं. दरअसल, दुर्रानी ने अपना नाम ‘नो फ्लाई लिस्ट’ से हटवाने के लिए इस्लामाबाद हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी. इसी याचिका के जवाब में पाकिस्तान की सरकार ने कोर्ट के सामने ये बातें कही हैं.
(फोटो- असद दुर्रानी)
असद दुर्रानी अगस्त 1990 से लेकर मार्च 1993 तक आईएसआई के प्रमुख थे. उन्होंने साल 1998 में पाकिस्तान की मिलिटरी इंटेलिजेंस के डायरेक्टर जनरल के तौर पर भी अपनी सेवाएं दी थीं. आईएसआई के पूर्व प्रमुख दुर्रानी पाकिस्तानी सेना की खुलकर आलोचना करते रहे हैं. दुर्रानी ने हाल ही में एक बयान में कहा था कि पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ा खतरा भारत नहीं बल्कि उसकी अपनी आंतरिक चुनौतियां हैं. उन्होंने पाकिस्तान की राजनीति में सेना के दखल की सच्चाई स्वीकार करते हुए कहा था कि ये देश के लिए बेहद खतरनाक है.
दुर्रानी ने ये भी कहा था कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की सबसे बड़ी समस्या ये है कि उनकी छवि एक ऐसे शख्स के तौर पर है जो सत्ता में अपने बलबूते नहीं आया है और जिसके कंधों पर खाकी (सेना) का बोझ है. दरअसल, पाकिस्तान की विपक्षी पार्टियां कहती रही हैं कि इमरान खान को सत्ता में लाने के पीछे सेना का ही हाथ है. कई नेता तंज में इमरान खान को 'सेना का दुलारा' भी कहते हैं.
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हालांकि, दुर्रानी तब से पाकिस्तानी सेना की नजरों में चुभे हुए हैं जबसे उन्होंने भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ के पूर्व प्रमुख एएस दौलत के साथ मिलकर साल 2018 में ‘द स्पाई क्रोनिकल्स: रॉ, आईएसआई एंड द इल्यूजन ऑफ पीस’ नाम की किताब लिखी. इस किताब के आने के बाद पाकिस्तान की सरकार ने दुर्रानी का नाम 'एग्जिट कंट्रोल लिस्ट' में डाल दिया और सेना ने उनकी पेंशन, भत्ते और अन्य सुविधाओं को छीन लिया था.
(फ़ोटो- रॉ के पूर्व प्रमुख एएस दौलत/ गेटी इमेजेस)
आईएसआई के पूर्व प्रमुख दुर्रानी ने इस्लामाबाद हाई कोर्ट में एग्जिट कंट्रोल लिस्ट से अपना नाम हटवाने के लिए याचिका दायर की थी. इसी याचिका के जवाब में पाकिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने बुधवार को कोर्ट को बताया कि दुर्रानी के देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने की वजह से उनका नाम ‘नो फ्लाई लिस्ट’ में डाला गया है. पाकिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि दुर्रानी की किताब में पाकिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी सामाग्री है जोकि ऑफिशल सीक्रेट्स ऐक्ट, 1923 के प्रावधानों का भी उल्लघंन है. इससे पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व पर सवालिया निशान लगाने वाले और उसके बारे में धारण बनाने की दुश्मनों की कोशिशों को बढ़ावा मिल सकता है.
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मंत्रालय ने आगे कहा कि दुर्रानी दुश्मनों के संपर्क में हैं, खासकर वह साल 2008 से ही भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ के संपर्क में हैं. एग्जिट कंट्रोल लिस्ट में दुर्रानी का नाम शामिल किए जाने के फैसले का बचाव करते हुए पाकिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि इससे दुर्रानी के मूल अधिकारों का हनन नहीं होता है. मंत्रालय ने कहा कि जन हित और पाकिस्तान की सुरक्षा और अखंडता को ध्यान में रखते हुए दुर्रानी के आने-जाने और भाषण देने की स्वतंत्रता पर कुछ पाबंदियां लगाई गई हैं.
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रक्षा मंत्रालय ने कहा कि दुर्रानी के खिलाफ जांच जारी है इसलिए उनका नाम नो-फ्लाई लिस्ट से नहीं हटाया जा सकता है. मंत्रालय ने तर्क दिया कि दुर्रानी कॉन्फ्रेंस और फोरम्स में शामिल होने के लिए विदेश यात्रा करना चाहते हैं जिसके राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर नतीजे हो सकते हैं. सरकार की तरफ से कहा गया कि दुर्रानी की नई किताब ‘ऑनर एमंग स्पाइस’ भी इसका सबूत है जिसे भारतीय प्रकाशकों और रॉ समर्थक तत्वों के जरिए प्रकाशित किया गया है.
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साल 2018 में जब 'द स्पाई क्रोनिकल्स' प्रकाशित हुई तो पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ने गृह मंत्रालय से दुर्रानी का नाम एग्जिट कंट्रोल लिस्ट में डालने के लिए कहा था. दुर्रानी ने साल 2019 में इस्लामाबाद हाई कोर्ट में इस फैसले को चुनौती दी थी. दुर्रानी की याचिका पर अगली सुनवाई फरवरी महीने के दूसरे हफ्ते में होनी है.
साल 2019 में पाकिस्तान की सेना ने कहा था कि दुर्रानी सेना की आचार संहिता का उल्लंघन करने के दोषी पाए गए हैं. सेना की एक अदालत ने बाद में दुर्रानी को पेंशन और अन्य सुविधाओं से वंचित कर दिया. दुर्रानी ने लाहौर हाई कोर्ट में इस आदेश को चुनौती दी जिसके बाद साल 2020 के अंत में उनकी पेंशन फिर से शुरू की गई. (फ़ोटो क्रेडिट- ihc.gov)