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विश्व

इस अहम मिशन के लिए चार भारतीयों को तैयार कर रहा है रूस

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भारत और रूस की दोस्ती काफी पुरानी है और दोनों देश कई क्षेत्रों में एक-दूसरे को सहयोग करते रहे हैं. रूस भारत के महत्वाकांक्षी मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन 'गगनयान' के लिए भारतीय एस्ट्रोनॉट्स को तैयार कर रहा है. रूस के गगारिन कॉस्मोनॉट ट्रेनिंग सेंटर में गगनयान मिशन के लिए चार भारतीय एस्ट्रोनॉट्स को बेहतरीन ट्रेनिंग दी जा रही है.
 

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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के मुताबिक, गगनयान प्रोजेक्ट के तहत, भारत साल 2022 में स्वतंत्रता दिवस की 75वीं वर्षगांठ से पहले अपने एस्ट्रोनॉट को अंतरिक्ष भेजेगा. इसरो ने भारतीय वायुसेना के साथ मिलकर चार पायलटों को गगनयान मिशन के लिए चुना था. रूस में इन भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में जाने, रहने और काम करने के तरीकों के बारे में प्रशिक्षण दिया जा रहा है.
 

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रूस की स्पेस एजेंसी रॉसकॉस्मस के मुताबिक, चारों भारतीय एस्ट्रोनॉट्स की सेहत अच्छी है और वे अपनी ट्रेनिंग के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं. ये चारों भारतीय पायलट ट्रेनिंग के लिए फरवरी महीने में रूस पहुंचे थे और साल 2021 की शुरुआत में अपनी ट्रेनिंग पूरी कर लेंगे.

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रूस की स्पेस एजेंसी रॉसकॉस्मस के बयान के मुताबिक, अंतरिक्ष की उड़ान के लिए जरूरी तमाम स्किल ट्रेनिंग प्रोग्राम में शामिल की गई हैं. इसमें रूसी भाषा सीखने समेत रूसी सोयूज वीकल के हर पहलू का अध्ययन भी शामिल है. अंतरिक्षयात्रियों को लैंडिंग के भी कई तरीके सिखाए जा चुके हैं. भारतीय अंतरिक्षयात्रियों को बिना ग्रैविटी वाले वातावरण में भी रहना सिखाया जा रहा है.

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भारत ने बजट की चुनौतियों के बावजूद ह्यूमन स्पेसफ्लाइट प्रोग्राम पर कदम आगे बढ़ाए हैं. हालांकि, कोरोना वायरस महामारी का असर गगनयान प्रोजेक्ट पर भी पड़ा. महामारी की वजह से भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों की ट्रेनिंग भी रुक गई थी.

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आज तक सिर्फ दो भारतीयों ने अंतरिक्ष की उड़ान भरी है लेकिन ये उड़ान रूस के सोयूज कैप्सूल और अमेरिकी स्पेस शटल के जरिए पूरी की गई थी. देश के पहले अंतरिक्षयात्री राकेश शर्मा थे जिन्होंने साल 1984 में रूस के सोयूज टी-11 में बैठकर अंतरिक्ष यात्रा की. हालांकि, गगनयान मिशन में भारतीय वेहिकल का ही इस्तेमाल किया जाएगा.

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रूस और भारत ने चारों एस्ट्रोनॉट्स की ट्रेनिंग के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. इसरो के मुताबिक, गगनयान मिशन के पहले क्रू में तीन एस्ट्रोनॉट्स शामिल होंगे और वे सात दिनों तक अंतरिक्ष की यात्रा करेंगे. देश का पहला मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन नरेंद्र मोदी सरकार की बेहद खास परियोजनाओं में से एक है. इसकी लागत करीब 10,000 करोड़ रुपए होने का अनुमान लगाया जा रहा है.

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