संयुक्त राष्ट्र में इजरायल के खिलाफ वोटिंग के दौरान गैर-हाजिर रहने को लेकर फिलिस्तीन की आपत्ति का भारत ने जवाब दिया है. भारत ने गुरुवार को कहा कि ऐसा पहली मर्तबा नहीं हुआ है कि किसी प्रस्ताव पर मतदान के दौरान भारत अनुपस्थित रहा हो. इससे पहले भी, भारत संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार परिषद में गाजा में हिंसा की जांच को लेकर वोटिंग के दौरान गैर-हाजिर रह चुका है. फिलिस्तीन के विदेश मंत्री डॉ. रियाद अल मलिकी ने संयुक्त राष्ट्र में वोटिंग के दौरान भारत के गैर-हाजिर रहने पर नाराजगी जाहिर की थी. इसके बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने यह प्रतिक्रिया दी है.
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संयुक्त राष्ट्र में इजरायल पर भारत के रुख से दुखी फिलिस्तीन के विदेश मंत्री डॉ. रियाद अल मलिकी ने भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर को पत्र लिखा था. संयुक्त राष्ट्र में इजरायल के खिलाफ जांच के प्रस्ताव पर मतदान में भारत ने हिस्सा नहीं लिया था. भारत उन 14 देशों में शामिल था, जो इजरायल के खिलाफ वोटिंग में अनुपस्थित रहे.
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विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची से मीडिया ब्रीफिंग में सवाल किया गया, फिलिस्तीन के विदेश मंत्री ने यूएनएचआरसी में भारत के रुख को लेकर चिंता जाहिर की है, भारत ने 17 मई को फिलिस्तीनियों के मुद्दों का समर्थन किया था लेकिन 27 मई को भारत वोटिंग से दूर रहा, फिलिस्तीन को लेकर भारत के इस विरोधाभासी रुख पर आप क्या कहेंगे? इस सवाल के जवाब में बागची ने कहा, 'फिलिस्तीन ने सभी देशों को इसी तरह के पत्र लिखे जिन्होंने वोटिंग से परहेज किया. हम पहले भी कई मौकों पर मतदान के दौरान गैर-हाजिर रहे हैं. यह कोई नई बात नहीं है. मुझे लगता है कि इससे हमारा रुख साफ नजर आता है और उन सवालों का भी जवाब है जो किए जा रहे हैं.'
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भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर को लिखे पत्र में फिलिस्तीनी विदेश मंत्री डॉ. रियाद अल मलिकी ने कहा है कि भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इजरायल के खिलाफ जांच के लिए लाए गए निर्णायक और महत्वपूर्ण वोटिंग प्रस्ताव के दौरान अनुपस्थित रहकर एक महत्वपूर्ण मौके को गंवा दिया है. उनका कहना था कि, 'संयुक्त राष्ट्र द्वारा इजरायल को जिम्मेदार ठहराने और उसके खिलाफ न्यायपूर्ण जांच होनी थी, लेकिन भारत बैठक के दौरान अनुपस्थित रहा. हालांकि वोटिंग में गैर-हाजिरी मानवाधिकार के खिलाफ उठती आवाज को दबाने में नाकामयाब रही है.'
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असल में, संयुक्त राष्ट्र की शीर्ष संस्था मानवाधिकार परिषद (UNHRC) ने वोटिंग के बाद 27 मई को इजरायल के खिलाफ 'युद्ध अपराधों' की जांच के लिए प्रस्ताव को पारित कर दिया. मानवाधिकार परिषद ने फिलिस्तीन-इजरायल के बीच संघर्ष में 'युद्ध अपराध' के तौर पर जांच के आदेश दिए हैं. जांच के लिए संयुक्त राष्ट्र ने एक आयोग का गठन किया है. 30 मई को लिखे पत्र में डॉ. मलिकी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र में पारित हुआ प्रस्ताव एक पक्षीय नहीं था बल्कि बहुपक्षीय परामर्श के बाद पारित हुआ.
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फिलिस्तीनी डॉ. रियाद अल मलिकी ने कहा कि वर्षों की जांच के बाद प्रस्ताव को ठोस रूप दिया गया जबकि इजरायल के विभिन्न संस्थान अपनी जवाबदेही से बचते रहे हैं. मलिकी ने भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर से कहा, "इसलिए, आपका अनुपस्थित रहना मानवाधिकार परिषद के महत्वपूर्ण कार्य को रोकने जैसा था. संयुक्त राष्ट्र के परिषद का काम सभी के मानवाधिकारों की रक्षा करनी है जिनमें फिलिस्तीनी भी शामिल हैं."
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भारत उन 14 देशों में से एक है जिन्होंने प्रस्ताव पर वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया. भारत के अलावा, फ्रांस, इटली, जापान, नेपाल, नीदरलैंड, पोलैंड और दक्षिण कोरिया भी वोटिंग में अनुपस्थिति रहे. 24 देशों ने इजरायल के खिलाफ और फिलिस्तीन के पक्ष में मतदान किया. पाकिस्तान, तुर्की, चीन, रूस, जर्मनी, ब्रिटेन, ऑस्ट्रिया सहित तमाम देशों ने 27 मई 2021 को फिलिस्तीन के पक्ष में मतदान किया था.
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भारत ने संयुक्त राष्ट्र में हालांकि वोटिंग में अपनी गैर-हाजिरी को लेकर कोई बयान नहीं दिया था. भारत के इस कदम को भी इजरायल के समर्थन के तौर पर ही लिया गया.
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जिनेवा में मतदान से 11 दिन पहले, संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि ने 16 मई को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक बयान में कहा था: "मैं न्यायपूर्ण फ़िलिस्तीनी उद्देश्य के लिए भारत के मजबूत समर्थन और दो-राष्ट्र समाधान के प्रति इसकी अटूट प्रतिबद्धता को दोहराता हूं." लेकिन भारत ने इजरायल-फिलिस्तीन के मसले पर सुरक्षा परिषद में बयान दिया तो उसमें 'न्यायपूर्ण फ़िलिस्तीनी उद्देश्य' और दो राष्ट्र समाधान जैसे शब्दों का उल्लेख नहीं किया.
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