दुनिया के 20 सबसे खतरनाक कट्टरपंथियों की सूची में नाम शामिल किए जाने पर मलेशिया के पूर्व प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद ने कड़ा ऐतराज जताया है. अमेरिकी वेबसाइट 'द काउंटर एक्स्ट्रेमिजम प्रोजेक्ट' ने इस सूची को जारी किया था और महातिर मोहम्मद इसमें 14वें नंबर पर थे. इस सूची में शामिल कट्टरपंथियों को अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया गया था.
महातिर मोहम्मद ने इसे खारिज करते हुए कई ट्वीट किए हैं. महातिर ने लिखा कि मुझे एक अमेरिकी वेबसाइट ने दुनिया के 20 सबसे खतरनाक कट्टरपंथियों में शामिल किया है. वेबसाइट ने मुझे पश्चिम, एलजीबीटी और यहूदियों की आलोचना करने वाला एक विवादित शख्सियत करार दिया है.
इसमें कहा गया है, महातिर हिंसा की घटनाओं के लिए प्रत्यक्ष तौर पर जिम्मेदार नहीं हैं. हालांकि, उनके विवादित बयानों की अक्सर पूरी दुनिया में निंदा होती है. उन पर ये आरोप भी लगता रहा है कि वो पश्चिम के खिलाफ कट्टरपंथियों की हिंसा को बढ़ावा देते रहे हैं.
EXTREMISM
— Dr Mahathir Mohamad (@chedetofficial) January 13, 2021
1. I have been named among the top 20 most dangerous extremists on earth, by a United States’ based website.
महातिर ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा, "ये सारी बातें फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के इस्लाम पर रुख के खिलाफ दिए गए बयान को लेकर कही गई हैं. मैक्रों का मानना है कि इस्लाम आतंकवाद को प्रोत्साहित करता है जोकि पूरी तरह गलत है. इस्लाम में साफ तौर पर किसी की हत्या करने की मनाही है. चाहे मुस्लिम हो या गैर-मुस्लिम, हर हत्या मानवता की हत्या मानी गई है. अगर कोई मुस्लिम किसी की हत्या करता है तो ये इस्लाम की सीख की वजह से नहीं है."
महातिर ने कहा, "मैंने इस्लाम को लेकर जो कुछ भी कहा, उसे वेबसाइट ने आधे-अधूरे तौर पर और तोड़-मरोड़कर ऐसे पेश किया कि मैं आतंकवाद की वकालत करता हूं. मैंने साफ तौर पर कहा था कि मुस्लिमों में बदले की भावना नहीं होती है." मलेशिया के पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि पश्चिम की आलोचना करने की वजह से आपको कट्टरपंथी करार दिया जा सकता है. अगर आप यहूदियों की थोड़ी भी आलोचना करते हैं तो आपको यहूदी विरोधी बता दिया जाएगा.
महातिर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लिस्ट में शामिल ना किए जाने को लेकर भी सवाल खड़े किए. महातिर ने कहा, "डोनाल्ड ट्रंप के समर्थकों ने यूएस कैपिटल में हिंसा भड़काई तो उनको भी कट्टरपंथी का टैग देना चाहिए. लेकिन अमेरिकी वेबसाइट ने उन्हें आतंकवादी करार नहीं दिया है जबकि मार्क जकरबर्ग (फेसबुक सीईओ) ने ट्रंप को 'लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार के खिलाफ हिंसा भड़काने में फेसबुक का इस्तेमाल करने के लिए' बैन कर दिया है."
महातिर ने कहा, "जॉर्ज डब्ल्यू बुश (अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति) और ब्लेयर (ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री) ने इराक के पास विध्वंसक हथियार होने के झूठे दावे के आधार पर उसे पूरी तरह तबाह कर दिया. चिलकोट रिपोर्ट में भी इसके सबूत दिए गए हैं. साल 2003 के हमले के बाद से आम नागरिकों की मौत का डेटा रख रही वेबसाइट इराक बॉडी काउंट के मुताबिक, इन दोनों नेताओं के ऐक्शन की वजह से 28,800 नागरिकों और लड़ाकुओं ने अपनी जानें गंवाईं. इनमें से ज्यादातर सिविलियन ही थे. इराक को लेकर बोले गए झूठ की वजह से इतने लोगों ने अपनी जानें गंवाईं तो क्या बुश और ब्लेयर को कट्टरपंथी करार दिया जाएगा? इन नेताओं ने दावा किया था कि हमले के बाद इराक में तानाशाही की समस्या खत्म हो जाएगी लेकिन 18 साल बाद भी तबाही जारी है."
महातिर ने इजरायली सुरक्षा बल पर भी सवाल खड़े किए और कहा कि ह्यूमन राइट्स वॉच ने बताया है कि 30 मार्च से लेकर 19 नवंबर 2018 के बीच इजरायली सुरक्षा बल ने 189 फिलीस्तीनी प्रदर्शनकारियों को मारा जिसमें 31 बच्चे भी शामिल हैं. इजरायल के बनने के बाद से ही हजारों फिलीस्तीनियों ने अपनी जानें गंवाई हैं लेकिन इस वेबसाइट ने आज तक एक भी इजरायली को आतंकवादियों या कट्टरपंथियों की सूची में शामिल नहीं किया गया है.
महातिर ने कहा, वेबसाइट दूसरों को आसानी से कट्टरपंथी करार देती है लेकिन अपनों के बीच इनकी पहचान कर पाने में सक्षम नहीं है. फिलीस्तीनियों के विस्थापन के जिम्मेदार लोग, इराक और अफगानिस्तान में कथित आतंकवाद के खिलाफ युद्ध का समर्थन करने वालों का नाम भी इसमें शामिल होना चाहिए. ऐसा लगता है कि मुझे मेरे विचारों के लिए बदनाम किया जा रहा है जबकि बाकी आतंकवादी और हिंसक गतिविधियों को अंजाम देने के बाद भी बचकर निकल जाते हैं.