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विश्व

पाकिस्तान में भारत की तरह इसलिए नहीं फैला कोरोना वायरस!

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अमेरिका-भारत समेत दुनिया के तमाम देशों में अब भी कोरोना वायरस का कहर जारी है, ऐसे में पाकिस्तान में वायरस की रफ्तार का थमना किसी रहस्य से कम नहीं है. पाकिस्तान में 14 जून को कोरोना वायरस के सबसे ज्यादा नए मामले सामने आए लेकिन उसके बाद से संक्रमण का ग्राफ लगातार नीचे गया है. हैरत इसलिए ज्यादा है कि पाकिस्तान ने ना तो पूरी तरह से लॉकडाउन लगाया और ना ही लोगों ने सोशल डिस्टेंसिंग जैसे नियमों का सख्ती से पालन किया. यहां तक कि सरकार ने कट्टरपंथी इस्लामिक गुरुओं के दबाव में धार्मिक स्थल भी बंद नहीं किए. इसके अलावा, खराब स्वास्थ्य सुविधाओं और दवाओं की कमी को देखते हुए आशंका जताई जा रही थी कि पाकिस्तान में कोरोना वायरस की तस्वीर और भयावह हो सकती है. कहा जा रहा है कि पाकिस्तान ने कोरोना महामारी पर कंट्रोल कर लिया है तो इसके पीछे चीन का ही हाथ है.

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पाकिस्तान में अभी कोरोना मरीजों की संख्या 2,94000 है, जिनमें से 6,255 लोगों की मौत हुई है. इसमें से 278,425 लोग रिकवर हो चुके हैं. सोमवार को पाकिस्तान में कोरोना संक्रमण के सिर्फ 496 नए मामले सामने आए हैं. जबकि भारत में कोरोना वायरस के सोमवार को 61,000 नए मामले सामने आए. भारत में 24 अगस्त तक कुल 31 लाख से ज्यादा केस आ चुके हैं.

पाकिस्तान में कोरोना कंट्रोल कराने में चीन की भूमिका
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शुरुआत में वायरस की तबाही से भारी संख्या में लोग संक्रमित हुए और मौत हुईं. लेकिन मध्य जून से मध्य जुलाई के बीच 40 दिनों के भीतर वायरस का प्रकोप अचानक कम होता नजर आया. रोजाना संक्रमण के मामले, एक्टिव केस और डेथ टोल ऊपर जाने के बाद अचानक से नीचे आ गए. रिकवरी रेट में भी तेजी से सुधार देखने को मिला.

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चीन के राजदूत याओ जिंग ने सोमवार को पाकिस्तान सरकार की तारीफ की. चीनी राजदूत ने एक बयान में कहा कि पाकिस्तान चमत्कारिक रूप से कोरोना महामारी से सफलतापूर्वक निपटने में कामयाब रहा है. इसके लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को पूरा श्रेय मिलना चाहिए. जिंग ने कहा कि कोविड-19 की महामारी ने पूरी दुनिया को एक बार में अपनी जद में ले लिया था. चीनी राजदूत ने ये भी कहा कि चीन ने कोरोना से निपटने में पाकिस्तान की हरसंभव मदद की.

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चीनी राजदूत याओ जिंग ने कहा कि उन्हें इस बात का संतोष है कि पाकिस्तान में कोरोना वायरस के मामले लगातार कम हो रहे हैं और यही वजह है कि वह कोविड-19 के फैलने के बाद पहली बार लोगों के बीच आए हैं. 

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पाकिस्तान चीन का करीबी दोस्त रहा है. महामारी की शुरुआत से ही उसने पाकिस्तान को भरपूर मदद पहुंचाई. जब कोरोना महामारी को लेकर चीन दुनिया भर में आलोचना झेल रहा था तो पाकिस्तान भी उसके समर्थन में मजबूती से खड़ा था. पाकिस्तान और कंबोडिया दो ऐसे देश थे जिन्होंने चीन के साथ जरूरत के वक्त में एकजुटता दिखाने के लिए वुहान से अपने नागरिकों को वापस नहीं बुलाया. पाकिस्तान ने अपनी संसद में फरवरी महीने में चीन के समर्थन में एक प्रस्ताव भी पास किया.

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दूसरी तरफ, चीन का बेल्ट ऐंड रोड परियोजना के तहत चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर में भारी भरकम निवेश है. चीन नहीं चाहता कि कोरोना महामारी की वजह से उसकी इतनी अहम परियोजना प्रभावित हो. जब पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी कोरोना महामारी के बीच पाकिस्तान पहुंचे थे तो चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर के कई एमओयू पर दोनों देशों ने हस्ताक्षर किए थे. दोनों देशों ने कोरोना वायरस की महामारी के बावजूद सीपीईसी की परियोजनाओं पर काम जारी रखने का भी संकल्प लिया था.

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चीन अपने यहां कोरोना वायरस पर रोकथाम कर चुका था और उसने पाकिस्तान के साथ अपने अनुभव साझा करने के लिए मेडिकल एक्सपर्ट की टीम भेजी. इसके अलावा, चीन को वेंटिलटर्स और जरूरी दवाओं की कई खेपें भेजीं. शी जिनपिंग ने पाकिस्तान को पीसीआर किट्स, ग्लव्स, मास्क से लेकर पीपीई किट तक सुरक्षात्मक उपकरण भी मुहैया कराए. चीन ने अपनी वैक्सीन पाकिस्तान को प्राथमिकता से उपलब्ध कराने के लिए कहा है. पाकिस्तान में चीन की वैक्सीन का ट्रायल भी चल रहा है.
 

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कोरोना वायरस की शुरुआत में ही पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी मदद मांगने के लिए चीन पहुंचे थे. अल्वी ने पाकिस्तानी न्यूज सर्विस एपीपी से कहा था कि वह चीन के लोगों और चीनी नेतृत्व के लिए एकजुटता दिखाने के लिए चीन के दौरे पर हैं. चीन की तारीफ करते हुए आरिफ अल्वी ने कहा था कि चीन की कोशिशों की वजह से पर्याप्त वक्त मिल गया है और चीन ने पूरी दुनिया के सामने एक मॉडल पेश किया है. अल्वी ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की और पाकिस्तान में कोरोना वायरस महामारी से निपटने की योजना को लेकर चर्चा की. दौरे से पहले अल्वी ने ट्विटर पर लिखा था, हमें पाकिस्तान के सबसे बड़े स्वास्थ्य संकट में चीन से तकनीकी मदद की भी जरूरत है. उनका अनुभव बिल्कुल अलग है. 

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पाकिस्तान का दौरा करने वाली चीनी मेडिकल एक्सपर्ट टीम ने इस्लामाबाद और रावलपिंडी के कई अस्पतालों का दौरा किया. मेडिकल टीम के सदस्य ली फेंगसेन ने कहा था, चीन में पिछले कुछ महीनों में कोविड-19 के खिलाफ फिजियोलॉजी, पैथोलॉजी और एपिडेमोलॉजी के आधार पर एक योजना को तैयार किया था. हमें उम्मीद है कि इस योजना से पाकिस्तान को भी महामारी से लड़ने में भी मदद मिलेगी. पाकिस्तान के नेशनल हेल्थ इंस्टिट्यूट के डॉक्टर खान ने बताया कि चीनी डॉक्टरों से हमें कोरोना वायरस और उसके इलाज के बारे में कई नई चीजें पता चलीं. केसों को कैसे संभाला जाए? किस तरह से कोरोना वायरस पर नियंत्रण किया जाए और सीरोलॉजी का इस्तेमाल कैसे किया जाए. ये बहुत ही मददगार साबित हुआ.
 

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