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विश्व

विदेशी मीडिया के सामने पाकिस्तानी पीएम इमरान खान ने यूं निकाली भड़ास

विदेशी मीडिया को दिया इंटरव्यू
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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने अलजजीरा को दिए एक इंटरव्यू में कहा है कि सेना के साथ उनके संबंध बेहद अच्छे हैं और सेना उनकी सरकार की हर नीति का समर्थन करती है. इमरान खान ने कहा कि चाहे भारत हो या अफगानिस्तान, सेना हमेशा हमारे साथ खड़ी है. इस इंटरव्यू में इमरान से कश्मीर समेत कई ऐसे सवाल पूछे गए जिसे लेकर उनकी झल्लाहट साफ नजर आई.
 

सरकार में भी सेना का प्रभुत्व
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पाकिस्तान में जो भी सरकारें आती हैं, वो सेना की छाया तले ही काम करती हैं. इमरान खान को भी सेना का लाडला करार दिया जाता है. विपक्षी दल आरोप लगाते रहे हैं कि सेना ने ही इमरान खान को सत्ता में बिठाया है. अलजजीरा के इंटरव्यू में भी इमरान खान से सवाल किया गया कि पाकिस्तान में ज्यादातर वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को सरकार के प्रमुख विभागों में जिम्मेदारी दी जाती है लेकिन वैश्विक छवि के लिए आम चेहरों को आगे क्यों नहीं किया जाता है. इस सवाल पर इमरान खान बिल्कुल असहज हो गए. 

इमरान खान ने दिया चैलेंज
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इमरान खान ने कहा, "कौन सी अंतरराष्ट्रीय छवि? ये लोकतांत्रिक सरकार है. हमने चुनाव जीता है. हम हर किसी को चुनावी प्रक्रिया पर सवाल खड़े करने का चैलेंज देते हैं. हमने विपक्ष से भी उन निर्वाचन क्षेत्रों का नाम देने के लिए कहा है जहां उन्हें लगता है कि नतीजे सही नहीं आए. हम उनकी जांच करने के लिए तैयार हैं."

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सेना और सरकार के संबंध अच्छे
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आर्मी के शीर्ष अफसरों के साथ अपने संबंधों को लेकर इमरान खान ने कहा कि पाकिस्तान में सेना और सरकार के संबंधों का इतिहास अच्छा नहीं रहा है. लेकिन हमारी सरकार के सेना के साथ अच्छे संबंध हैं. मुझे लगता है कि ये सबसे बैलेंस रिलेशनशिप है. हम मिलकर काम करते हैं और सेना सरकार की हर नीति का समर्थन करती है. वो चाहे भारत हो या अफगानिस्तान में शांतिपूर्ण समाधान, सेना हर जगह हमारे साथ खड़ी है.
 

CPEC में भ्रष्टाचार पर उठ रहे सवाल
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इन दिनों पाकिस्तान में सेना में भ्रष्टाचार को लेकर सवाल उठ रहे हैं. प्रधानमंत्री इमरान खान के विशेष सहायक और रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल असीम सलीम बाजवा पर करप्शन के आरोप लग रहे हैं. जनरल असीम बाजवा सीपीईसी यानी चाइना पाकिस्तान कॉरिडोर के चेयरमैन भी हैं. फैक्ट फोकस नाम की एक वेबसाइट में रिपोर्ट छपी थी जिसमें दावा किया गया है कि जनरल असीम बाजवा की संपत्ति दिन दूनी रात चौगुनी हो गई है. रिपोर्ट के बाद शुक्रवार को असीम बाजवा ने प्रधानमंत्री इमरान खान के विशेष सहायक के पद से इस्तीफा दे दिया. हालांकि, इमरान खान ने इस्तीफा स्वीकार नहीं किया है.

इमरान खान का दावा
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हालांकि, पाकिस्तान के पीएम इमरान खान ने कहा है कि उनके दो साल के शासन में कोई भी बड़ा करप्शन स्कैंडल नहीं हुआ है. इमरान खान ने कहा, भ्रष्टाचार समाज का सबसे बड़ा दुश्मन है. आज पाकिस्तान में कोई भी बड़ा स्कैंडल नहीं हुआ है क्योंकि हमने इसे टॉप लेवल से कंट्रोल कर लिया है. इमरान खान ने कहा, समस्या ये है कि नीचे के स्तर पर भ्रष्टाचार की समस्या अभी भी बनी हुई है. ये जल्द खत्म नहीं होने वाला है और हमें इसे खत्म करने में काफी संघर्ष करना पड़ेगा. जो लोग भी सत्ता में आते रहे हैं, वे अपनी ताकत का इस्तेमाल पैसे बनाने में करते रहे हैं और हम उन्हें कभी उन्हें गुनहगार नहीं ठहरा पाते थे. इतिहास में पहली बार हो रहा है कि शीर्ष स्तर पर बैठे भ्रष्टाचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई हो रही है.
 

सरकार और मंत्री असुरक्षित
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पत्रकारों और मीडिया की आजादी को लेकर पूछे गए सवाल पर भी इमरान खान भड़क गए. इमरान ने कहा, इसके क्या सबूत हैं.. किस तरह से अभिव्यक्ति की आजादी खत्म की जा रही है, क्या आप ये बता सकते हैं? मेरे दो साल के कार्यकाल में कितने पत्रकारों का अपहरण हुआ है. दुर्भाग्य से ये हम हैं, हमारी सरकार और हमारे मंत्री हैं जो असुरक्षित महसूस करते हैं. मीडिया असुरक्षित नहीं है. ऐसा एक भी उदाहरण नहीं है. अगर कोई प्रधानमंत्री के खिलाफ फर्जी खबर छापता है और प्रधानमंत्री उसे कोर्ट में ले जाता है तो क्या ये डराना-धमकाना हुआ?

कश्मीर को लेकर कितनी उम्मीद बची?
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भारत के साथ संबंध- क्या कश्मीर को लेकर उनके मन में कोई उम्मीद बची हुई है? क्या वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बातचीत करके कोई समाधान निकालने की आस पाले हुए हैं? इमरान खान ने इस सवाल के जवाब में कहा कि दुर्भाग्य से भारत में अतिवादी सरकार चला रहे हैं. मैं इस बात को स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि मैं सैन्य समाधान में यकीन नहीं रखता हूं. जिस पल मैं प्रधानमंत्री बना, मैंने भारत की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाया लेकिन त्रासदी ये है कि भारत में नाजी से प्रेरित हिंदू अतिवादियों का राज है. आरएसएस के इतिहास को देखेंगे तो वो अतिवादी संगठन है जिसका अब 1.3 अरब की परमाणु शक्ति संपन्न देश पर नियंत्रण है.

कश्मीर पर अलग-थलग पाकिस्तान
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क्या पश्चिमी देशों ने कश्मीर मुद्दे पर अकेला छोड़ दिया है? इमरान खान ने कहा कि उन्होंने कश्मीर पर वैश्विक समर्थन जुटाने की भरपूर कोशिश की लेकिन नाकामयाब रहे. इमरान ने कहा, हमने लगभग हर दरवाजा खटखटाया और हम आगे भी ऐसा करते रहेंगे. उन्होंने चेतावनी दी कि भारत और पाकिस्तान के बीच किसी भी संघर्ष के नतीजे पूरी दुनिया को भुगतने होंगे. इमरान खान ने कहा, दुनिया के तमाम देश इस मुद्दे पर इसलिए खामोश हैं क्योंकि उन्हें अपने व्यावसायिक हितों की चिंता है. भारत एक बड़ा बाजार है और वे इसका लाभ लेने के लिए कश्मीर में हो रहे अन्याय को नजरअंदाज कर रहे हैं. लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि हम खामोश होकर बैठ जाएंगे और इसे स्वीकार कर लेंगे. हम कोशिश करना जारी रखेंगे.
 

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सऊदी को कश्मीर पर आना चाहिए आगे
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कश्मीर मुद्दे पर मुस्लिम देशों से समर्थन ना मिलने पर पाकिस्तान के विदेश मंत्री इतने परेशान हो गए कि उन्होंने इस्लामिक सहयोग संगठन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था. इससे सऊदी अरब नाराज हो गया और बाद में सेना प्रमुख कमर बाजवा डैमेज कंट्रोल के लिए सऊदी पहुंचे थे. इमरान खान ने इस मामले को लेकर कहा, "ये कुरैशी की फ्रस्टेशन नहीं थी. हम कश्मीर मामले में ओआईसी को लीड करते हुए देखना चाहते थे. हमने कोशिश भी की. हमने साफ कर दिया है कि सऊदी अरब पाकिस्तान का हमेशा दोस्त रहेगा लेकिन हम चाहते हैं कि वो कश्मीर मसले पर आगे आए."

इजरायल पर पुराना रुख रहेगा कायम
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'इजरायल-फिलीस्तीन'

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा कि इजरायल-फिलीस्तीन मुद्दा जब तक नहीं सुलझेगा जब तक फिलीस्तीनियों को उनका हक नहीं मिल जाता है. यूएई और इजरायल के रिश्ते समान्य करने के हालिया कदम को लेकर इमरान ने कहा कि अगर फिलीस्तीनियों पर एकतरफा समझौता लागू किया जाता है तो वो काम नहीं आने वाला है. इजरायल को ये बात अच्छी तरह से समझ लेनी चाहिए कि अगर वे फिलीस्तीन को उनका देश नहीं सौंपते हैं तो ये मुद्दा खत्म नहीं होने वाला है. चाहे भले ही कितने ही देश इजरायल को मान्यता दे दें, ये मुद्दा मिटने वाला नहीं है. ये इजरायल के हक में ही है कि वो एक न्यायपूर्ण समझौते पर पहुंचे.
 

चीन के साथ ही है हमारा भविष्य
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'हमारा भविष्य चीन के साथ है'

ऐसी रिपोर्ट्स आ रही हैं कि पाकिस्तान में चीन की महत्वपूर्ण परियोजना चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर को लेकर पाकिस्तान खुश नहीं है और इस समझौते के कुछ पहलुओं पर फिर से निगोशिएशन करना चाहता है. इमरान खान ने इसे लेकर कहा, चीन के साथ हमारा रिश्ते पहले से भी मजबूत हुआ है. हमारी नजर में हमारा भविष्य, आर्थिक भविष्य चीन के ही साथ जुड़ा हुआ है. चीन किसी भी दूसरे देश की तुलना में तेजी से आगे बढ़ रहा है और चीन ने जिस तरह से अपने लोगों को गरीबी रेखा से उठाया है, उससे पाकिस्तान को फायदा मिल सकता है.
 

अमेरिका के साथ संबंध
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पाकिस्तान की विदेश नीति में अमेरिका की अब क्या जगह रह गई है? इमरान खान ने गुस्सा जाहिर करते हुए कहा, ऐसा क्यों है कि पाकिस्तान को किसी एक कैंप में ही रहना होगा. हर देश अपने हितों को देखता है. क्या हम सबके साथ अच्छे संबंध नहीं रख सकते हैं. अमेरिका के साथ हमारे संबंध बेहतर दौर में हैं क्योंकि हम अफगानिस्तान में शांति समझौते में सहयोगी हैं. कुछ साल पहले अमेरिका के साथ हमारे ऐसे संबंध नहीं थे. लेकिन अब अमेरिका और पाकिस्तान के रिश्ते बेहद अच्छे हैं.

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