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विश्व

पाकिस्तान ने भारत से बातचीत शुरू करने के लिए रखीं ये 5 शर्तें

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पाकिस्तान ने भारत से बातचीत शुरू करने के लिए पांच शर्तें रखी हैं. पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार डॉ. मोइद यूसुफ ने भारतीय मीडिया को दिए इंटरव्यू में कहा है कि पाकिस्तान भारत के साथ शांतिपूर्ण संबंध चाहता है और सभी विवादों का समाधान बातचीत के जरिए करना चाहता है.

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पाकिस्तान के अधिकारी ने ये भी दावा किया है कि भारत ने बातचीत की इच्छा जताई थी लेकिन इस्लामाबाद ने कश्मीर को भी वार्ता में शामिल करने पर जोर दिया. हालांकि, भारत सरकार की तरफ से इसे लेकर पुष्टि नहीं हुई है. डॉ. यूसुफ ने कहा कि भारत को कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म का फैसला भी वापस लेना चाहिए. यूसुफ ने कहा कि कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म करना भारत का आंतरिक मामला नहीं है बल्कि संयुक्त राष्ट्र का मामला है.

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हालांकि, भारत से बातचीत के लिए डॉ. यूसुफ ने अपनी कुछ मांगें भी आगे रखी हैं. उन्होंने कहा कि भारत को कश्मीर के सभी राजनीतिक कैदियों को रिहा करना होगा, वहां सारे प्रतिबंध खत्म करने होंगे और गैर-कश्मीरियों को बसाने वाले डोमिसाइल लॉ को रद्द करना होगा. डॉ. यूसुफ ने फर्जी आरोप लगाते हुए कहा कि भारत को मानवाधिकार उल्लंघन रोकना होगा और पाकिस्तान में सरकार प्रायोजित आतंकवाद खत्म करना होगा.

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5 अगस्त 2019 को मोदी सरकार ने कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म कर दिया था. पाकिस्तान ने इस कदम की तीखी आलोचना की थी. हालांकि, तमाम कोशिशों के बावजूद वो इस मुद्दे का अंतरराष्ट्रीयकरण करने में नाकाम रहा. डॉ. यूसुफ ने पाकिस्तान में आतंकवाद को लेकर इंडियन इंटेलिजेंस एजेंसी (RAW) की भूमिका होने का आरोप लगाया. डॉ. यूसुफ ने कहा, पाकिस्तान के पास इस बात के सबूत है कि दिसंबर 2014 में पेशावर में हुए आतंकवादी हमले का मास्टरमाइंड रॉ के संपर्क में था. उन्होंने ये भी आरोप लगाया कि भारत ने पाकिस्तान के पड़ोसी देश में अपने दूतावास का इस्तेमाल कर ग्वादर में फाइव स्टार होटल, कराची में चीनी वाणिज्यिक दूतावास और पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज पर आतंकी हमले में मदद की. भारत ने बलूच अलगाववादियों के धड़ों को मिलाने के लिए करीब 1 मिलियन डॉलर खर्च किए.

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डॉ. यूसुफ ने कहा कि प्रधानमंत्री इमरान खान एक शांत पड़ोसी देश चाहते थे लेकिन भारत की विस्तारवादी और हिंदुत्ववादी नीतियां शांति के रास्ते में सबसे बड़ी अड़चन बन गईं. उन्होंने कहा कि अगर भारत एक कदम उठाता है तो पाकिस्तान दो कदम आगे बढ़ा देगा. पाकिस्तान के अधिकारी ने कहा कि कश्मीरी किसी भी वार्ता में मुख्य पक्षकार होंगे और उनकी भावनाओं का ध्यान रखा जाना चाहिए.

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अपनी सरकार की तारीफ करते हुए डॉ. यूसुफ ने कहा कि पाकिस्तान की सरकार अपने देश की आर्थिक सुरक्षा और संपन्नता के लिए काम कर रही है जबकि भारत की सरकार हिंदुत्व की विचारधारा में अंधी हो गई है. उसने अपनी विस्तारवादी नीतियों की वजह से पड़ोसी देशों को खो दिया है जबकि पाकिस्तान क्षेत्र में शांति कायम कर रहा है.

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डॉ. यूसुफ ने कहा, भारत समझौता और बाबरी मस्जिद के मामले में दोषियों को सजा दिलाने में नाकाम रहा जबकि वो पाकिस्तान पर आतंकवाद के मामलों में देरी करने का आरोप लगाता रहता है. इससे भारत का दोहरा चरित्र उजागर होता है.

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गिलगित-बाल्टिस्तान और कश्मीर मुद्दे को लेकर डॉ. यूसुफ ने कहा कि पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों को मान्यता देता है और 80 लाख कश्मीरियों की महत्वाकांक्षाओं को पूरा करना चाहता है. भारत का प्रोपेगैंडा कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान के सिद्धांत को हिला नहीं पाएगा. बता दें कि पाकिस्तान गिलगित-बाल्टिस्तान में अपना अवैध कब्जा मजबूत करने की तमाम कोशिशें कर रहा है.

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राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने कहा कि पाकिस्तान शांति के पक्ष में है और भारत के साथ किसी भी बातचीत का स्वागत करता है लेकिन कश्मीरियों की जिंदगी सामान्य होनी चाहिए, कश्मीरियों को किसी भी बातचीत में मुख्य पक्षकार के तौर पर शामिल किया जाना चाहिए और पाकिस्तान के खिलाफ प्रायोजित आतंकवाद को रोकना चाहिए. उन्होंने अंत में चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि भारत की किसी भी गुस्ताखी का जवाब पाकिस्तान की तरफ से जरूर दिया जाएगा.
 

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