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विश्व

पाकिस्तान के साथ मिलकर रूस करने जा रहा ये बड़ा काम, बढ़ेगी भारत की टेंशन

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पाकिस्तान अब रूस की मदद से 1100 किमी लंबी गैस पाइपलाइन का निर्माण करने जा रहा है. इससे पाकिस्तान लिक्विफाइड गैस के और ज्यादा टर्मिनल ऑपरेट कर सकेगा. पाकिस्तान और रूस के बीच हुए समझौते के तहत, रूसी कंपनियां कराची के कासिम बंदरगाह से पंजाब प्रांत के कसूर तक लंबी 1122 किमी पाइपलाइन के लिए लिक्विड प्राकृतिक गैस की आपूर्ति करेगी.

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पाकिस्तान की सरकार ने इस समझौते को लेकर एक बयान जारी किया है. इसमें कहा गया है, इस परियोजना से पाकिस्तान और रूस के बीच आर्थिक सहयोग के एक नए युग की शुरुआत होगी. पाकिस्तान में रूस का ये निवेश दोनों देशों के बीच बढ़ती करीबी का एक और संकेत है. कुछ ही दिनों पहले, रूस की सेना और पाकिस्तान की सेना ने एक संयुक्त अभ्यास में भी हिस्सा लिया था. भारत इस संयुक्त अभ्यास को लेकर रूस के सामने कड़ी आपत्ति जाहिर करता रहा है.

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रिपोर्ट के मुताबिक, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने खुद इस परियोजना में दिलचस्पी दिखाई थी. दोनों देश इस समझौते को आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम बता रहे हैं. इस समझौते से दशकों बाद पाकिस्तान में रूस की मौजूदगी होगी. रूस ने इससे पहले, ऑयल ऐंड गैस डिलवपमेंट कंपनी और पाकिस्तान स्ट्रीट मिल्स को स्थापित करने में भी मदद की थी. रूस का पाकिस्तान की परियोजना में बड़े स्तर पर निवेश करना भारत के लिए किसी झटके से कम नहीं है.

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पिछले कुछ सालों में भारत के पारंपरिक और भरोसेमंद दोस्त रूस की नजदीकी पाकिस्तान से बढ़ी है. शीतयुद्ध के समय, पाकिस्तान रूस के विरोधी गुट में शामिल था और रूस भारत के ज्यादा करीब था. लेकिन अब अमेरिका के लिए पाकिस्तान उतना महत्वपूर्ण नहीं रहा और इस वजह से अब वो चीन और रूस के नजदीक जा रहा है. भारत भी अब तक अपनी रक्षा जरूरतों के लिए रूस पर निर्भर रहता था और हथियारों के लगभग सारे सौदे वहीं से होते थे. लेकिन पिछले कुछ वक्त से भारत अपनी रक्षा जरूरतें इजरायल और अमेरिका से भी पूरी कर रहा है. रूस भारत के लिए तब तक ज्यादा जरूरी रहा, जब तक भारत और अमेरिका के रिश्तों में असहज स्थिति थी. लेकिन अब ऐसा नहीं है.

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पाकिस्तान की इस गैस पाइपलाइन परियोजना में 51 से 74 फीसदी तक हिस्सेदारी होगी जबकि बाकी हिस्सेदारी रूस की होगी. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के पेट्रोलियम मामलों के सलाहकार नदीम बाबर ने एक इंटरव्यू में ये जानकारी दी है. पाकिस्तान की गैस वितरण कंपनी सुइ साउदर्न गैस कॉर्पोरेशन और सुई नॉर्दर्न गैस पाइपलाइन लिमिटेड ने पाइपलाइन के लिए भूमि अधिग्रहण करना शुरू कर दिया है. रूस की कंपनी मुख्यतः पाइपलाइन के निर्माण का कार्य करेगी.

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पाकिस्तान प्राकृतिक गैस के लिए उभरते बाजारों में से एक है. पाकिस्तान में गैस उत्पादन में गिरावट आई है जिससे उसे दूसरे देशों से प्राकृतिक गैस का आयात करना पड़ रहा है. पाकिस्तान ने तेल और गैस के भंडार की खोज के लिए 20 ब्लॉकों की नीलामी भी शुरू की है जिसके लिए जनवरी महीने में बोली लगाई जाएगी.

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पाकिस्तान ने पांच साल पहले प्राकृतिक गैस का पहला कार्गो मंगाया था. अब पाकिस्तान के पास दो एलएनजी टर्मिनल हैं. पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के सलाहकार बाबर ने ब्लूमबर्ग से बताया कि पाकिस्तान के दोनों टर्मिनलों की पूरी क्षमता का इस्तेमाल हो रहा है जिससे सर्दियों में गैस की मांग को पूरा किया जा सके. दिसंबर महीने के लिए एलएनजी के 12 कार्गो और जनवरी महीने के लिए 11 कार्गो सुरक्षित रखे गए हैं. बाबर ने बताया कि अगले कुछ सालो में एनर्गास और ताबीर एनर्जी के दो और एलएनजी टर्मिनल खुल जाएंगे.

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बाबर ने कहा, पाकिस्तान ने प्रतिदिन 700 मिलियन क्यूबिक फीट एलएनजी गैस उत्पादन के लिए कई समझौते किए हैं. प्रधानमंत्री इमरान खान बिजली उत्पादकों और उपभोक्ताओं की मांग को देखने के बाद तय करेंगे कि पाकिस्तान को अगले पांच साल के लिए एलएनजी के लिए एक और कॉन्ट्रैक्ट की जरूरत है या नहीं. उन्होंने कहा, पाकिस्तान ने फैसला किया है कि जनवरी 2021 से वो अब साफ ईंधन यूरो-5 डीजल का ही आयात करेगा. इसी साल, पाकिस्तान ने गैसोलिन को लेकर भी ऐसा ही फैसला किया था. पाकिस्तान इसी महीने से गैस उत्पादन क्षमता प्रतिदिन 150 मिलियन क्यूबिक फीट तक बढ़ाने की भी योजना बना रहा है.

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