आरएमएस टाइटेनिक अपनी पहली ही यात्रा में हादसे का शिकार हो गया था. वह त्रासद घटना आज भी इतिहास में दर्ज है. उसका गम भुलाने और टाइटेनिक को हमेशा के लिए यादों में कैद रखने के लिए एक रेप्लिका टाइटेनिक का निर्माण चल रहा है. इसे टाइटेनिक II नाम दिया गया है. दुर्घटना के शिकार हुए टाइटेनिक के रूट पर ही रेप्लिका टाइटेनिक भी सफर करेगा.(प्रतीकात्मक फोटो-रॉयटर्स)
सीएनएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया के कारोबारी और नेता क्लाइव पामर ने रेप्लिका बनाने का काम जोरशोर से शुरू करने का ऐलान किया है. हालांकि कुछ विवादों के बाद 2015 में इसका काम रुक गया था. ब्लूस्टार लाइन की कंपनी मिनरलॉजी और चीनी सरकार की कंपनी साइटिक लिमिटेड के बीच रेप्लिका निर्माण पर पनपे विवाद को अब सुलझा लिया गया है. इसलिए उम्मीद है कि 2022 में रेप्लिका टाइटेनिक अपनी यात्रा पर निकल पड़ेगा.(प्रतीकात्मक फोटो-रॉयटर्स)
रेप्लिका के निर्माण में इस बात का पूरा खयाल रखा जाएगा कि 1912 वाले टाइटेनिक की सभी विशेषताएं शामिल कर ली जाएं. अति आधुनिक लाइफ बोट, नेविगेशन औजार और राडार टेक्नोलॉजी से युक्त टाइटेनिक का आकार-प्रकार रेप्लिका में भी दिखाने की तैयारी है. टाइटेनिक II भी डीजल पर चलेगा, इसलिए टाइटेनिक की चिमनी से उठते धुएं की खूबसूरती रेप्लिका में भी देखी जा सकेगी.(प्रतीकात्मक फोटो-रॉयटर्स)
सबसे खास बात यह है कि टाइटेनिक II भी उसी रूट पर सफर करेगा जिस पर टाइटेनिक निकला था. इंग्लैंड के साउथंप्टन से शुरू होकर न्यूयॉर्क तक के सफर का लोग आनंद ले सकेंगे. हालांकि क्रूज अरबिया ने बताया है कि टाइटेनिक II दुबई तक की यात्रा करेगा और टाइटेनिक के पहले और अंतिम सफर के ठीक 110 साल बाद वहां पहुंचेगा.(प्रतीकात्मक फोटो-रॉयटर्स)
टाइटेनिक II बनाने वाली कंपनी ब्लूस्टार लाइन की मानें तो जहाज में 9 डेक और 835 केबिन होंगे जिसमें 2,435 यात्री सफर कर सकेंगे. पामर ने अपने एक आधिकारिक बयान में कहा कि ब्लूस्टार लाइन टाइटेनिक का वास्तविक सफर कराएगी. टाइटेनिकII के अंदर की बनावट और साज-सज्जा हूबहू टाइटेनिक की तरह होगी. इतना ही नहीं, सुरक्षा के सभी उपाय करते हुए और 21वीं सदी की टेक्नोलॉजी का भरपूर उपयोग करते हुए यात्रियों को भोग-विलास की सारी सुविधाएं दी जाएंगी.(प्रतीकात्मक फोटो-रॉयटर्स)
RMS टाइटैनिक भाप से चलने वाला दुनिया का सबसे बड़ा जहाज था. वह साउथंप्टन (इंग्लैंड) से 10 अप्रैल 1912 को अपनी पहली यात्रा पर रवाना हुआ था. चार दिन बाद 14 अप्रैल 1912 को एक बर्फ से पहाड़ से टकरा कर डूब गया जिसमें 1,517 लोगों की मौत हुई जो इतिहास की सबसे बड़ी समुद्री घटनाओं में से एक है.(प्रतीकात्मक फोटो-रॉयटर्स)
टाइटैनिक को उस वक्त के सबसे अनुभवी इंजीनियरों ने डिजाइन किया था और इसके निर्माण में सबसे आधुनिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया था. हालांकि इतनी उच्च स्तर की सुरक्षा ओर सुविधाओं के बावजूद टाइटैनिक डूब गया था. सुविधाओं की जहां तक बात है, तो टाइटैनिक में फर्स्ट क्लास डेक पर स्विमिंग पूल, एक जिमखाना, एक स्क्वैश कोर्ट, तुर्की बाथरूम, इलेक्ट्रिक बाथरूम और एक कैफे था.(प्रतीकात्मक फोटो-रॉयटर्स)