सऊदी अरब ने बुधवार को कहा है कि वह संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की तरह इजरायल के साथ कूटनीतिक रिश्ते कायम नहीं करेगा. सऊदी अरब ने कहा है कि जब तक इजरायल फिलीस्तीनियों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुए शांति समझौते पर हस्ताक्षर नहीं कर देता, तब तक वह उसके साथ कूटनीतिक रिश्ते नहीं रखेगा.
पिछले सप्ताह इजरायल के साथ रिश्ते सामान्य करने वाला यूएई पहला खाड़ी देश और तीसरा अरब देश बन गया था. इससे पहले अरब के देशों मिस्त्र और जॉर्डन ने इजरायल के साथ कूटनीतिक संबंध स्थापित कर चुके हैं. यूएई और इजरायल के बीच हुए इस समझौते में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भी अहम भूमिका रही.
ट्रंप ने इस समझौते के ऐलान के बाद कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि यूएई की
तरह बाकी अरब देश भी इजरायल के साथ रिश्ते सामान्य कर लेंगे. इस समझौते के
होने के कई दिनों बाद तक सऊदी अरब की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई. सऊदी
अरब पर यूएई की ही तरह समझौते का ऐलान करने को लेकर अमेरिकी दबाव भी था.
हालांकि, सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने फिलीस्तीन के
मुद्दे के समाधान ना निकलने तक ऐसी किसी भी संभावना से इनकार कर दिया है.
प्रिंस फैसल ने बुधवार को संवाददाताओं से कहा, "इजरायल के साथ सामान्य रिश्ते की पहली शर्त यही है कि अंतरराष्ट्रीय समझौतों के अनुरूप फिलीस्तीन के साथ शांति कायम हो. अगर ऐसा हो जाता है तो फिर सारी चीजें संभव हैं." सऊदी अरब का इजरायल को लेकर पहले भी यही रुख रहा है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बुधवार को जब व्हाइट हाउस की न्यूज कॉन्फ्रेंस में सवाल किया गया कि क्या वे उम्मीद कर रहे हैं कि सऊदी भी इजरायल के साथ रिश्ते सामान्य करेगा तो उन्होंने हां में जवाब दिया.
इजरायल और यूएई के बीच हुए समझौते के तहत इजरायल ने वेस्ट बैंक को मिलाने
की अपनी योजना को स्थगित कर दिया है. इस समझौते के बाद ईरान के खिलाफ लामबंदी
और मजबूत हो गई है क्योंकि यूएई, इजरायल और अमेरिका को मध्य-पूर्व में ईरान
सबसे बड़ा खतरा नजर आता है.
विदेश मंत्री प्रिंस फैसल ने कहा कि सऊदी 2002 की अरब शांति वार्ता की बुनियाद पर इजरायल के साथ शांति कायम करने के पक्ष में है हालांकि, प्रिंस फैसल ने इजरायल के वेस्ट बैंक में बस्तियां बसाने और कब्जा जमाने जैसी एकतरफा नीतियों को अवैध और घातक बताया है.
इजरायल की आलोचना के साथ ही प्रिंस फैसल ने बेहद सतर्कता के साथ पिछले
सप्ताह यूएई के साथ हुई उसकी डील को लेकर उम्मीद भी जताई है. प्रिंस फैसल
ने कहा, वेस्ट बैंक के कब्जे के खतरे को रोकने के लिए की गई कोई भी कोशिश
को सकारात्मक ही माना जाएगा.
सऊदी अरब इजरायल को मान्यता नहीं देता है. 2002 में अरब देशों ने इजरायल के साथ रिश्ते सामान्य करने के लिए एक पहल की थी. इसके तहत, फिलीस्तीन के लिए राष्ट्र का दर्जा और इलाके से इजरायल की वापसी की बात कही गई थी. हालांकि, सऊदी अरब 2002 की शांति वार्ता से पीछे हट गया.
फिलिस्तीन ने यूएई और इजरायल के बीच हुए समझौते का कड़ा विरोध करते हुए इसे रद्द करने की मांग की है. फिलीस्तीन ने कहा है कि ये समझौता करके यूएई ने उसके साथ धोखा किया गया है. फिलीस्तीनी समूहों का कहना है कि इससे फिलीस्तीनियों के उद्देश्य और उनके अधिकारों को पूरी तरह से किनारे कर दिया गया है. हमास के प्रवक्ता हाजेम कासिम ने एक बयान में कहा था, ये समझौता फिलिस्तीनियों की किसी तरह से मदद नहीं करता है बल्कि इससे यहूदीवाद की सेवा होगी. ये समझौता इजरायल को फिलिस्तीनियों के अधिकारों के हनन और उनके खिलाफ अपराध को जारी रखने के लिए प्रेरित करता है.
वहीं, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने भी इजरायल के सात दोस्ती की संभावनाओं को खारिज कर दिया. मंगलवार को दुनिया चैनल को दिए गए इंटरव्यू में इमरान खान ने कहा, "पहले दिन से ही इजरायल को लेकर हमारा रुख बिल्कुल स्पष्ट है और कायद-ए-आजम मुहम्मद अली जिन्ना ने कहा था कि जब तक फिलीस्तिनियों को उनके अधिकार और उनका राष्ट्र वापस नहीं मिल जाता है, तब तक पाकिस्तान इजरायल को मान्यता नहीं दे सकता है."
इमरान खान ने कहा था कि इजरायल को मान्यता देना कश्मीर पर पाकिस्तान के रुख से पीछे हटने के बराबर है. इमरान ने कहा था कि फिलीस्तीनियों का मामला कश्मीरियों की ही तरह है क्योंकि उनके भी अधिकारियों को छीन लिया गया है और इजरायल उनके साथ ज्यादतियां कर रहा है.