अफगानिस्तान में तालिबान का विभिन्न इलाकों पर कब्जा करने का क्रम जारी है. इस बीच, अफगान सरकार के एक वार्ताकार ने गुरुवार को कहा कि तालिबान ने 7,000 विद्रोही कैदियों की रिहाई के बदले में तीन महीने के संघर्ष विराम की पेशकश की है. अफगान सरकार के वार्ताकार नादर नादरी ने कहा कि यह एक बड़ी मांग है. विद्रोहियों ने तालिबान के नेताओं को संयुक्त राष्ट्र की ब्लैक लिस्ट से हटाने की भी मांग की है.
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तालिबान की यह मांग तब सामने आई है जब अफगान नेता दोहा वार्ता के एजेंडे पर चर्चा के लिए तैयार हैं. टोलो न्यूज के मुताबिक, राष्ट्रपति अशरफ गनी गुरुवार को अफगानिस्तान के राजनीतिक नेताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता करने वाले हैं. इसमें तालिबान से बातचीत की रूपरेखा पर चर्चा की जाएगी. अफगान राजनेताओं की 11 सदस्यीय टीम शांति प्रक्रिया को लेकर तालिबान के साथ बातचीत के लिए इस सप्ताह के अंत तक दोहा का दौरा करने वाली है.
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गुरुवार की बैठक में दोहा वार्ता के एजेंडे और यात्रा की समयसीमा को लेकर चर्चा होनी है. 11 सदस्यीय टीम के सदस्य मोहम्मद करीम खलीली ने बुधवार को बताया, 'तालिबान के साथ बातचीत के मुख्य एजेंडे में संघर्ष विराम होगा. हम समयरेखा पर चर्चा कर रहे हैं. बातचीत के एजेंडे को लेकर शुक्रवार को तस्वीर और साफ होगी.
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खलीली ने कहा, "हम सभी युद्धरत पक्षों को चेतावनी देते हैं कि जंग से उत्साहित होने की जरूरत नहीं है. अगर यह स्थिति बनी रही, तो हम अफगानिस्तान को और नाजुक स्थिति में धकेल देंगे."
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वहीं तालिबान ने कहा है कि समूह के प्रमुख वार्ताकार मुल्ला अब्दुल गनी बरादर अफगान राजनीतिक नेताओं के साथ वार्ता में तालिबान प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे. गुलबुद्दीन हिकमत्यार के नेतृत्व वाले हिज्ब-ए-इस्लामी ने कहा है कि बैठक में हिकमत्यार भी शामिल होंगे.
( बगराम जेल से रिहाई के बाद बाहर आते अफगान कैदी. फोटो-AP)
हिज्ब-ए-इस्लामी के एक सदस्य हुमायूं जरीर ने कहा कि हेकमत्यार अफगानिस्तान के सीनियर नेताओं के साथ तालिबान संग शांति वार्ता के लिए दोहा बैठक में भाग लेंगे. हाई काउंसिल ऑफ नेशनल रिकाउंसिलेशन (एचसीएनआर) के प्रमुख अब्दुल्ला अब्दुल्ला ने भी कहा कि यात्रा का मुख्य मकसद देश में शांति लाना है.
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इस बीच, पाकिस्तान की तरफ से बड़ी संख्या में लोगों ने अफगानिस्तान सीमा में दाखिल होने की गुरुवार को कोशिश की. न्यूज एजेंसी एएफपी के मुताबिक, अधिकारियों ने बताया कि सीमा पर जुटी भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैसे के गोले दागने पड़े.
( पाकिस्तान सीमा पर जुटे तालिबान समर्थक, फोटो-AP)
तालिबान ने अफगानिस्तान की तरफ से स्पिन बोल्डक जिले में क्रॉसिंग पर कब्जा कर लिया, इसके बाद पाकिस्तान ने अपनी सीमा को सील कर दिया. पाकिस्तान के एक अधिकारी ने बताया कि लगभग 400 लोगों की एक अनियंत्रित भीड़ ने जबरदस्ती सीमा पार करने की कोशिश की. उन्होंने पत्थर फेंके, जिससे हमें आंसू गैस का इस्तेमाल करने के लिए मजबूर होना पड़ा.
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पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर करीब 1,500 लोग सीमा पर इकट्ठा हुए थे. नाम न छापने की शर्त पर एक दूसरे अधिकारी ने कहा कि हमें लाठीचार्ज करना पड़ा क्योंकि लोग बेकाबू हो रहे थे. चमन बॉर्डर पर तैनात एक सीनियर सरकारी अधिकारी जुमादाद खान ने बताया कि स्थिति अब "नियंत्रण में" है.
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तालिबान के एक सूत्र ने एएफपी को बताया कि पाकिस्तान में घुसने की उम्मीद में सैकड़ों लोग अफगान की तरफ भी जमा हो गए थे. सूत्रों ने बताया कि वो हम पाकिस्तानी अधिकारियों से बात कर रहे हैं. सीमा खोलने के लिए एक औपचारिक बैठक होनी है और उम्मीद है कि बॉर्डर एक या दो दिन में खुल जाएगा.
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