तालिबान ने भले ही अफगानिस्तान पर कब्जा जमा लिया है, लेकिन उसे देश के अधिकांश मौद्रिक भंडार और संपत्ति तक पहुंचने में बहुत समय लग सकता है. अफ़ग़ान के केंद्रीय बैंक, द अफ़ग़ानिस्तान बैंक (डीएबी) के पास पिछले सप्ताह तक लगभग करीब 10 अरब डॉलर की संपत्ति थी. हालांकि, इनमें से अधिकतर संपत्तियां अफगानिस्तान से बाहर दूसरे देशों के बैंकों में सुरक्षित हैं. तालिबान के कब्जे से पहले ही काबुल छोड़ चुके डीएबी के कार्यवाहक गवर्नर अजमल अहमदी ने इसकी पुष्टि की है. उन्होंने ट्वीट कर कहा कि तालिबान बैंक के स्टाफ से खजाने की लोकेशन को लेकर पूछताछ कर रहा है इसलिए वह कुछ जानकारियां साझा कर रहे हैं.
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अहमदी ने अफगानिस्तान के केंद्रीय बैंक की संपत्ति को लेकर सिलसिलेवार ट्वीट किए. उन्होंने कहा, 'पहला, केंद्रीय बैंक में पिछले सप्ताह तक कुल मुद्रा 9.0 अरब डॉलर थी. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि केंद्रीय बैंक ने अपनी तिजोरी में नौ अरब डॉलर रखे हुए हैं. अंतरराष्ट्रीय मानकों के मुताबिक, अधिकांश संपत्तियां सुरक्षित और कोषागार और सोने के तौर पर रखी जाती हैं.'
First, total DAB reserves were approximately $9.0 billion as of last week.
— Ajmal Ahmady (@aahmady) August 18, 2021
But this does not mean that DAB held $9.0 billion physically in our vault.
As per international standards, most assets are held in safe, liquid assets such as Treasuries and gold https://t.co/onpttXyTv7
इसका मतलब है कि इनमें से अधिकतर संपत्तियां अफगानिस्तान से बाहर हैं, जो अभी तालिबान की पहुंच में नहीं हैं. अफगानिस्तान की कुल मौद्रिक संपत्ति में से मामूली सी नकद राशि अफगानिस्तान में पड़ी हुई है.
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अहमदी के अनुसार, अफगान केंद्रीय बैंक डीएबी के प्रमुख निवेशों में फेडरल रिजर्व होल्डिंग्स में 7 अरब डॉलर, यूएस बिल और बॉन्ड में 3.1 अरब डॉलर, डब्ल्यूबी रैमपी एसेट्स में 2.4 अरब डॉलर, सोना के तौर पर 1.2 अरब और कैश अकाउंट में 0.3 अरब डॉलर शामिल हैं. इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय खातों में 1.3 अरब डॉलर और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स में 0.7 अरब डॉलर निवेश किया गया है.
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Interesting note was that the IMF had approved a SDR650 billion allocation recently.
— Ajmal Ahmady (@aahmady) August 18, 2021
DAB was set to receive approximately $340 million on August 23rd.
Not sure if that allocation will now proceed with respect to Afghanistan https://t.co/T2ewqLIDOJ
डीएबी के कार्यवाहक गवर्नर अहमदी ने बताया कि सुरक्षा स्थिति बिगड़ने के बाद अमेरिकी डॉलर की खेप नहीं पहुंची और इस वजह से अफगानिस्तान केंद्रीय बैंक में नकदी नहीं के बराबर है. तालिबान के कब्जे के डर से अमेरिका सहित अधिकांश देशों ने बीते दिनों अफगानिस्तान को नकदी भेजना बंद कर दिया था. अहमदी ने लिखा कि तालिबान ने सैन्य बल के दम पर जीत तो हासिल कर ली लेकिन सरकार चलाना इतना आसान काम नहीं है.
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On Friday morning, I received a call notifying me that there would be no further USD shipments (we were expecting one on Sunday, the day Kabul fell)
— Ajmal Ahmady (@aahmady) August 18, 2021
On Saturday, banks placed very large USD bids as customer withdrawals accelerated.
जो बाइडेन के नेतृत्व वाले अमेरिकी प्रशासन ने रविवार को अमेरिका में अफगान सरकार के बैंक खातों को सील कर दिया. अब अमेरिकी बैंकों में रखे अरबों डॉलर तक पहुंचना तालिबान के लिए मुश्किल हो गया है. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने मौजूदा स्थिति को देखते हुए अफगानिस्तान को 440 मिलियन डॉलर के फंड ट्रांसफर को भी रोक दिया है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका के दबाव में आईएमएफ ने यह कदम उठाया है.
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हालांकि, आईएमएफ के प्रवक्ता कहना था कि चूंकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय अफगानिस्तान में सरकार को मान्यता देने को लेकर भ्रमित है. इसलिए आईएमएफ संसाधनों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विकासशील देशों को मिलने वाली मदद (SDRs) वाले फंड का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है.
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अहमदी अपने सिलसिलेवार ट्वीट में कहते हैं, यह देखते हुए कि तालिबान अब भी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध सूची में है. ऐसे में उम्मीद है कि इन संपत्तियों को फ्रीज कर दिया जाएगा और तालिबान उसे हासिल नहीं कर सकेगा. उन्होंने कहा, "हम कह सकते हैं कि तालिबान के लिए सुलभ धन अफगानिस्तान के कुल अंतरराष्ट्रीय भंडार का शायद 0.1-0.2% है. इससे ज्यादा नहीं."
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Given that the Taliban are still on international sanction lists, it is expected (confirmed?) that such assets will be frozen and not accessible to Taliban.
— Ajmal Ahmady (@aahmady) August 18, 2021
I can’t imagine a scenario where Treasury/OFAC would given Taliban access to such fundshttps://t.co/P2G2uqmmdt
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुसार, अप्रैल तक अफगानिस्तान के केंद्रीय बैंक के पास 9.4 अरब डॉलर की आरक्षित संपत्ति थी. यह देश की सलाना कमाई का तकरीबन एक तिहाई है. द वॉशिंगटन पोस्ट ने इस मामले से परिचित सूत्र के हवाले से लिखा कि अफगान सरकार के अरबों डॉलर अमेरिका में रखे हैं. आम तौर पर विकासशील देशों के केंद्रीय बैंक अक्सर अपनी संपत्ति को फेडरल रिजर्व बैंक ऑफ न्यूयॉर्क (FRBNY) या बैंक ऑफ इंग्लैंड जैसे संस्थानों के पास रखते हैं. अफगानिस्तान केंद्रीय बैंक के स्टेटमेंट के मुताबिक, उसके पास 6.1 अरब डॉलर का निवेश है जिसका बड़ा हिस्सा अमेरिका से किया गया है.
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अहमदी के अनुसार, इन फंडों को अंतरराष्ट्रीय मानकों पर सुरक्षित रखा गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन प्रशासन के अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि अमेरिका में अफगान सरकार के पास केंद्रीय बैंक की कोई भी संपत्ति तालिबान को उपलब्ध नहीं कराई जाएगी. सीधे शब्दों में कहें तो तालिबान अफगान की विदेशी संपत्ति और संपत्ति का इस्तेमाल करने या वापस लेने में सक्षम नहीं है. इनमें से एक बड़ा हिस्सा अमेरिका में पड़ा है. अफगान की कुल मौद्रिक संपत्ति का केवल एक छोटा सा हिस्सा तालिबान के लिए सुलभ हो सकता है.
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खड़ा होगा आर्थिक संकट: अफगानिस्तान आने वाले समय में आर्थिक संकट से घिर सकता है, क्योंकि मौजूदा हालात के बीच अनिश्चितता बनी हुई है. फंड तक पहुंच नहीं होने के कारण अफगानिस्तान में नकद लगभग शून्य है. और अमेरिकी ट्रेजरी की हरी झंडी के बिना मुमकिन नहीं है कि फंड मुहैया कराने वाली अन्य संस्थाएं तालिबान का समर्थन करें. अफगानिस्तान अब भी सरकार चलाने के तौर-तरीकों पर चर्चा चल रही है.
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बैंकों में पैसा नहीं है: अफगानिस्तान के कई स्थानीय बैंक पहले ही ग्राहकों से कह चुके हैं कि वे उनके डॉलर वापस नहीं कर सकते क्योंकि सेंट्रल बैंक ने स्थानीय बैंकों को पैसे की आपूर्ति नहीं की है. इस बात की पुष्टि डीएबी के कार्यवाहक गवर्नर अजमल अहमदी ने भी की है. अहमदी ने कहा, यह सही कि अफगान बैंकों के पास पैसा नहीं है. इसलिए नहीं कि रुपया चोरी हो गया है या तिजोरी में रखा गया है, बल्कि इसलिए कि सभी डॉलर अंतरराष्ट्रीय खातों में हैं जिन्हें फ्रीज कर दिया गया है. तालिबान भले ही बंदूक की नोंक पर जीत गया हो, लेकिन वो देश कैसे चलाएगा? यह सब इतना आसान नहीं है.
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I believe local banks have told customers that they cannot return their dollars - because DAB has not supplied banks with dollars
— Ajmal Ahmady (@aahmady) August 18, 2021
This is true. Not because funds have been stolen or being held in vault, but because all dollars are in international accounts that have been frozen
अहमदी को डर है कि संपत्ति को सील किए जाने के कारण अर्थव्यवस्था को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है. उन्होंने कहा कि अफगान मुद्रा का मूल्यह्रास होगा और महंगाई तेजी से बढ़ेगी. इसलिए, तालिबान का शासन अफगानिस्तान को एक आर्थिक संकट की ओर ले जा सकता है, जो अंततः गरीबों को नुकसान पहुंचाएगा क्योंकि भोजन जैसी आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में तेज वृद्धि होगी.
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Taliban should note this was in no way the decision of DAB or its professional staff.
— Ajmal Ahmady (@aahmady) August 18, 2021
It is a direct result of US sanctions policy implemented by OFAC. Taliban and their backers should have foreseen this result
Taliban won militarily - but now have to govern. It is not easy.