पाकिस्तान के अरशद नदीम पुरुषों की भाला फेंक प्रतियोगिता के फाइनल में ओलंपिक पदक हासिल करने से चूक गए और पांचवें स्थान पर रहे, जबकि भारत के नीरज चोपड़ा ने गोल्ड मेडल जीता. इसी तरह, भारोत्तोलन चैंपियन तलहा तालिब 25 जुलाई को टोक्यो ओलंपिक में इतिहास रचने से वंचित रह गए.
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भारत के गोल्डन बॉय नीरज चोपड़ा ने भी पाकिस्तान के अरशद नदीम की तारीफ की. नीरज चोपड़ा ने कहा कि अरशद नदीम का पोडियम पर होना भी अच्छा होता. इससे एशिया का नाम होता. अरशद नदीम का प्रदर्शन भी बहुत अच्छा था. लेकिन वह पदक नहीं जीत सके. अच्छा होता अगर एक और एशियाई देश के खाते में मेडल आता.
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टोक्यो ओलंपिक में अपने खिलाड़ियों के कामयाबी की दहलीज से चंद कदम पीछे रह जाने पर पाकिस्तानियों का सरकार के खिलाफ गुस्सा सामने आ रहा है. पाकिस्तानी हस्तियों सहित अन्य नागरिकों का मानना है कि अगर उनकी सरकार पर्याप्त मदद मुहैया कराती तो खिलाड़ी देश का नाम जरूर रोशन करते. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने टिकटॉक वीडियो शेयर कर अपने खिलाड़ियों को प्रेरित करने की कोशिश की, जिस पर लोगों का कहना था कि इससे काम नहीं चलने वाला और उन्हें कुछ और करना चाहिए.
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यही नहीं, कई लोगों ने पिछले सप्ताह ट्विटर पर पाकिस्तान के संबंधित अधिकारियों और खेल संघों से नदीम और तालिब जैसे एथलीटों और खिलाड़ियों का समर्थन करने और अतिरिक्त ध्यान देने का आग्रह किया है, ताकि उनकी प्रतिभा को और निखारा जा सके.
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पाकिस्तानी खिलाड़ियों के लिए आवाज उठाने वालों में अभिनेता अदनान सिद्दीकी भी हैं. उन्होंने पूर्व ओलंपियन मुहम्मद आशिक के दुखद उदाहरण को साझा करने के लिए ट्विटर का सहारा लिया. ओलंपिक खेल चुके मुहम्मद आशिक को सरकार की अनदेखी की वजह से मुफलिसी में रिक्शा चलाना पड़ा, 2018 में लाहौर में उनका निधन हो गया था.
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अभिनेता अदनान सिद्दीकी ने ट्विटर पर दिवंगत साइकलिस्ट मुहम्मद आशिक की रिक्शा वाली तस्वीर के साथ खेद व्यक्त करते हुए कहा, 'पाखंड देखिए, जब वे मेडल लाते हैं तो उन्हें हीरो बना दिया जाता है लेकिन बाद में उन्हें दुख की जिंदगी जीने के लिए छोड़ दिया जाता है.' अदनान सिद्दीकी ने कहा, 'ये विजेता हमारे गौरव हैं, हमारी जिम्मेदारी हैं. हमें अपने सितारों का ख्याल रखना चाहिए!'
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The hypocrisy of making them heroes when they bring medals and leaving them to live a life of misery. These champs are our pride, our responsibility🙏🏽 #takecareofourstars pic.twitter.com/SKBk1utwRC
— Adnan Siddiqui (@adnanactor) August 10, 2021
मुहम्मद आशिक ने 1960 में रोम ओलंपिक में 25 साल की उम्र में पुरुषों के स्प्रिंट 1,000 मीटर टाइम ट्रायल में भाग लिया. चार साल बाद, टोक्यो ओलंपिक में उन्होंने 4000 मीटर के व्यक्तिगत और टीम प्रतिस्पर्धा में हिस्सा लिया.
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हालांकि, मुहम्मद आशिक कोई मेडल जीतने में नाकाम रहे. लेकिन मुहम्मद आशिक ने एशियाई खेलों में ख्याति अर्जित की. उन्होंने खेल से संन्यास लेने से पहले राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पाकिस्तान रेलवे का प्रतिनिधित्व किया.
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पाकिस्तान में टिकटॉक पर प्रतिबंध के बावजूद रविवार को प्रधानमंत्री इमरान खान ने देश के एथलीटों के लिए ट्विटर पर एक प्रेरक टिकटॉक वीडियो साझा किया, और स्वाभाविक रूप से कई लोगों ने महसूस किया कि वह प्रेरणा प्रदान करने के अलावा और भी बहुत कुछ कर सकते हैं.
(फोटो-रॉयटर्स)
I want the youth of Pakistan to watch the race and learn the most important lesson that sports taught me: "you only lose when u give up." pic.twitter.com/a7UnCvnwSR
— Imran Khan (@ImranKhanPTI) August 8, 2021
उसी दिन, अभिनेत्री मेहविश हयात ने भी ट्वीट करते हुए कहा, "मुझे उम्मीद है कि अरशद नदीम की सफलता 'उत्प्रेरक' का काम करेगी. हमें अपनी प्रतिभाओं पर खर्च करने की आवश्यकता है. इसे उन स्कूलों में शुरू करने की जरूरत है जहां खेलों को पाठ्यक्रम का अभिन्न अंग बनाने की आवश्यकता है. यह बाकी सब चीजों की तरह नहीं है. कुछ ऐसा करना होगा जो पहले नहीं हुआ. मौके को भुनाने की जरूरत है!”
(फोटो-@MehwishHayat)
I hope that #ArshadNadeem ‘s success provides the ‘catalyst’ we need to invest in our talent. This needs to start in schools where sports need to be made an integral part of the curriculum. This cannot - like everything else - be a flash in the pan. Time to seize the moment! 🙌🏻🇵🇰
— Mehwish Hayat TI (@MehwishHayat) August 8, 2021