भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने टोक्यो ओलंपिक में गुरुवार को कांस्य पदक जीता तो पूरा देश खुशी से झूम उठा. टोक्यो ओलंपिक में भारत के खाते में अब तक कुल पांच पदक आए हैं जिनमें से दो रजत पदक और तीन कांस्य पदक हैं. हालांकि, जीत के जश्न के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर के एक ट्वीट पर नई बहस शुरू हो गई. शशि थरूर ने ट्वीट किया, भारत में हम ओलंपिक में कुछ कांस्य पदक जीतने पर जश्न मना रहे हैं जबकि चीन के अतिराष्ट्रवादी लोग अपने खिलाड़ियों के रजत पदक जीतने पर भी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं.
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वहीं, उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने खेल भावना की वकालत की. उन्होंने लिखा, रजत और कांस्य पदक जीतने वाले चीनी एथलीट को अपने देश में ट्रोलिंग का शिकार होना पड़ रहा है. हम मेडल के मामले में भले ही बहुत पीछे हैं लेकिन मुझे गर्व है कि हम खेल भावना के साथ हैं जहां पर खेल में हिस्सा लेना ज्यादा मायने रखता है.
कहा जा रहा है कि इस बार के ओलंपिक में चीनी खिलाड़ियों पर बेहतर प्रदर्शन को लेकर जितना दबाव है, उतना कभी नहीं रहा. गोल्ड से कम किसी भी मेडल पर चीन के खिलाड़ियों को सोशल मीडिया पर ट्रोल किया जा रहा है और उनकी देशभक्ति तक पर सवाल उठाए जा रहे हैं.
चीन की मिक्स्ड डबल टेबल टेनिस टीम ने पिछले हफ्ते ओलंपिक के फाइनल में हार के बाद रोते हुए देशवासियों से माफी मांगी. टीम के खिलाड़ी लिउ शिवेन ने कहा, मैं देश के लोगों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाया. मैं सबसे माफी मांगता हूं. वहीं उनके साथी शू शिन ने कहा, पूरे देश की नजरें इस फाइनल पर थीं. मुझे लगता है कि चीन की टीम इस नतीजे को स्वीकार नहीं कर सकती. ये मैच जापान की टीम के खिलाफ था जिस पर चीनी टीम अक्सर हावी रही है.
चीन के सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म वीबो पर कुछ यूजर्स ने दोनों खिलाड़ियों को निशाने पर लिया और कहा कि उन्होंने देश का सिर नीचा कर दिया. वहीं, कुछ यूजर्स ने कहा कि रेफरी का झुकाव जापान के खिलाड़ी की तरफ था जिसकी वजह से टीम मैच हार गई.
चीन टोक्यो ओलंपिक में फिलहाल सबसे ज्यादा गोल्ड मेडल (34 गोल्ड मेडल) के साथ शीर्ष स्थान पर काबिज है. अमेरिका दूसरे स्थान पर (30 गोल्ड मेडल) जबकि आयोजक देश जापान 22 गोल्ड मेडल के साथ तीसरे स्थान पर है. चीन में ओलंपिक मेडल की टैली को देश की ताकत और स्वाभिमान का पर्याय बना दिया गया है. यहां तक कि विदेशियों से चीनी खिलाड़ियों की हार को ऐसे देखा जा रहा है जैसे उन्होंने देश के साथ कोई धोखा किया हो.
जब चीन की मिक्स्ड डबल टेबल टेनिस टीम जापान के हाथों हार गई तो चीन के लोगों के गुस्से की कोई सीमा ही नहीं रही. दरअसल, जापान और चीन की दुश्मनी पुरानी है. 1931 में जापान ने उत्तरी चीन के मंचूरिया पर कब्जा कर लिया था. इसमें चीन के लाखों लोग मारे गए थे. अतीत की इस कड़वाहट का साया आज भी दोनों देशों के रिश्ते पर है. जापान की टेबल टेनिस टीम के खिलाफ हुआ ये मैच चीनियों के लिए जंग के मैदान से कम नहीं था. मैच के दौरान चीनी सोशल मीडिया पर जापानी खिलाड़ियों के खिलाफ अपशब्दों का भी इस्तेमाल करते रहे.
वहीं, चीन के ली जुनहुई और लिउ यूचेन को बैडमिंटन डबल्स के फाइनल में ताइवान से हारने की वजह से निशाना बनाया गया. वीबो पर एक यूजर ने लिखा, क्या आप मैच के दौरान सो रहे थे. आपने कोई कोशिश ही नहीं की. चीन ताइवान को भी वन चाइना पॉलिसी के तहत अपना एक स्वायत्त प्रांत मानता है. हालांकि, ताइवान के लोग अपने लिए एक अलग राष्ट्र चाहते हैं.
चीन में गोल्ड मेडल जीतने वाले खिलाड़ियों को भी नहीं बख्शा जा रहा है. शूटर यांग कियान Nike के जूतों के कलेक्शन को दिखाने की वजह से ऑनलाइन हेट का शिकार हो गईं. यांग को बाद में वो पोस्ट ही डिलीट करनी पड़ी. दरअसल, Nike ब्रान्ड ने चीन के शिनजियांग में मजदूरों से जबरन श्रम कराए जाने पर चिंता जाहिर करते हुए वहां के कपास का बहिष्कार कर दिया था.
उनकी टीममेट वांग लुयाओ को भी महिला 10 मीटर एयर राइफल के फाइनल में जगह ना बना पाने को लेकर लोगों की नाराजगी झेलनी पड़ी. एक यूजर ने लिखा, क्या हमने तुम्हें ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए इसलिए भेजा था कि तुम हार जाओ? स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक, सोशल मीडिया वीबो पर आलोचना और ट्रोलिंग इतनी ज्यादा थी कि 33 यूजर्स के अकाउंट सस्पेंड करने पड़े.
हालांकि, चीन के कुछ लोग अपनी खिलाड़ियों की हार के बावजूद उन्हें सपोर्ट कर रहे हैं. सरकारी मीडिया ने भी जनता से ज्यादा तार्किक होने की अपील की है. शिन्हुआ न्यूज एजेंसी ने एक आर्टिकल में लिखा, उम्मीद है कि स्क्रीन के सामने बैठे सभी लोग गोल्ड मेडल्स, जीत और हार को तार्किकता और खेल भावना के अनुरूप लेंगे.