तुर्की के राष्ट्रपति रेचप तैय्यप एर्दोगन ने तालिबान से अफगानिस्तान पर कब्जा खत्म करने को कहा है. उन्होंने सोमवार को कहा कि तालिबान को अपने भाइयों की जमीन पर कब्जा खत्म कर देना चाहिए. एर्दोगन ने तालिबान की तरफ से काबुल एयरपोर्ट की सुरक्षा में तैनात तुर्की के सुरक्षा बलों को दी गई धमकी पर कहा कि यह उचित तरीका नहीं है. तालिबान ने कहा था कि यदि तुर्की के सुरक्षा बल काबुल एयरपोर्ट की सुरक्षा के लिए अफगानिस्तान में रुके तो इसके नतीजे भुगतने पड़ेंगे.
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तालिबान ने 1996 से 2001 तक अफगानिस्तान पर कड़ा शासन किया और काबुल में पश्चिमी समर्थित सरकार को गिराने और इस्लामी शासन को फिर से लागू करने के लिए 20 वर्षों तक संघर्ष किया. तालिबान अब अफगानिस्तान पर फिर से कब्जा हासिल करने के लिए नए सिरे से प्रयास कर रहा है क्योंकि विदेशी सैनिक वापस जा रहे हैं.
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रॉयटर्स के मुताबिक, उत्तरी साइप्रस रवाना होने से पहले एर्दोगन ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, तालिबान को अपने भाइयों की जमीन पर कब्जा खत्म करने और दुनिया को यह दिखाने की जरूरत है कि अफगानिस्तान में अभी शांति है. एर्दोगन ने कहा कि तालिबान का रुख ऐसा नहीं है जैसा मुसलमान एक-दूसरे के साथ बर्ताव करते हैं.
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तुर्की ने नाटो सुरक्षा बलों के हटने के बाद काबुल एयर पोर्ट को चलाने और सुरक्षा मुहैया कराने की पेशकश की है. अमेरिका से कई दौर की बातचीत के बाद तुर्की अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में एयरपोर्ट को वित्तीय, लॉजिस्टिक और पॉलिटिकल मदद मुहैया कराने की हामी भरी है.
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पिछले हफ्ते तालिबान ने काबुल एयर पोर्ट के लिए अपने सुरक्षा बलों की तैनाती के तुर्की के फैसले पर चेतावनी दी थी. तालिबान ने कहा था कि तुर्की का यह फैसला गलत है और उसे इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा. इस बयान के सवाल पर एर्दोगन ने कहा कि तालिबान ने कहीं यह नहीं कहा है कि हम तुर्की को नहीं चाहते हैं.
(तालिबान प्रवक्ता सुहैल शाहीन, फोटो-Getty Images)
अमेरिकी और नाटो सैनिकों की वापसी के बाद तालिबान ने अफगानिस्तान के 85 फीसदी हिस्से पर कब्जा करने का दावा किया है. माना जा रहा है कि तालिबान ने अब तक देश के कई महत्वपूर्ण सीमा चौकियों पर कब्जा कर लिया है. आतंकी संगठन ने अफगानिस्तान में कई प्रांतीय राजधानियों की भी घेराबंद की है.
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एर्दोगन ने आगे कहा कि तुर्की काबुल हवाई अड्डे के मसले पर तालिबान के साथ बातचीत करने की योजना बना रहा है. हालांकि, तालिबान ने अंकारा के प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा है कि तुर्की को भी 2020 के समझौते के अनुरूप अपने सैनिकों को वापस बुलाना चाहिए.
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काबुल हवाई अड्डा रणनीतिक लिहाज से अहम माना जाता है. काबुल में सभी देशों के राजनयिक अधिकारी हैं. यही एक मात्र एयरपोर्ट है जहां से आपातकालीन स्थिति में राजनयिकों को निकाला जा सकता है.
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जून में नाटो नेताओं के साथ बैठकों के अंत में एर्दोगान ने कहा था कि तुर्की अमेरिका के नेतृत्व वाले नाटो बलों के जाने के बाद अफगानिस्तान में मिशन में पाकिस्तानी और हंगरी की भागीदारी की मांग कर रहा है.
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