अमेरिका ने गुरुवार को चीन के खिलाफ एक और बड़ी कार्रवाई की है. अमेरिका ने चीन में वीगर मुस्लिमों के मानवाधिकार उल्लंघन को लेकर शीर्ष चीनी अधिकारियों पर प्रतिबंध लागू कर दिए हैं. इस कदम के बाद अमेरिका और चीन के बीच तनाव बढ़ना तय है.
अमेरिका ने शिनजियांग प्रांत में कम्युनिस्ट पार्टी के सचिव चेन कुआंगो को ब्लैकलिस्ट कर दिया है. चेन चीन के ताकतवर पोलितब्यूरो के सदस्य भी हैं. उनके अलावा, तीन अन्य चीनी अधिकारियों पर भी प्रतिबंध लगाया गया है. हॉन्ग कॉन्ग और कोरोना महामारी को लेकर अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती तकरार को देखते हुए इस कार्रवाई की संभावना काफी पहले से नजर आ रही थी.
अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने संवाददाताओं को इस फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि अमेरिका की ओर से पहली बार चीन के इतनी बड़ी रैंक के अधिकारी पर प्रतिबंध लगाया गया है. उन्होंने कहा, ब्लैकलिस्ट करना कोई मजाक नहीं है. इससे ना केवल एक संदेश जाता है बल्कि उस शख्स की दुनिया भर में मूवमेंट करने और बिजनेस करने की आजादी खत्म हो जाती है.
अमेरिका स्थित चीनी दूतावास ने इसे लेकर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. चीन वीगर मुस्लिमों के साथ भेदभाव और प्रताड़ना के आरोप को खारिज करता रहा है. चीन दलील देता है कि वह आतंकवाद से लड़ने के लिए प्रशिक्षण केंद्र चला रहा है. हालांकि, कई रिपोर्ट्स में प्रशिक्षण केंद्र के नाम पर हिरासत में रखे जा रहे वीगर मुस्लिमों की दयनीय स्थिति को खुलासे किए जाते रहे हैं.
व्हाइट हाउस ने बुधवार को कहा था कि आने वाले हफ्ते में अमेरिका चीन के खिलाफ कई और कदम उठाने वाला है. वीगर मुसलमानों के अलावा, हॉन्ग कॉन्ग में चीन के नए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून को लेकर भी अमेरिका चीन के खिलाफ ऐक्शन के मूड में है.
अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रॉबर्ट ओ ब्रायन ने बुधवार को
ब्रिटिश उपनिवेश हॉन्ग कॉन्ग में नए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून को लेकर कहा
कि चीन ने इस शहर पर कब्जा कर लिया है.
ब्रायन ने कहा था, राष्ट्रपति ट्रंप पहले ही कह चुके हैं कि अब हॉन्ग कॉन्ग को
एक स्वायत्त क्षेत्र के तौर पर नहीं देखा जाएगा बल्कि चीन का हिस्सा माना
जाएगा. हॉन्ग कॉन्ग को स्वायत्त क्षेत्र के तौर पर अमेरिका से मिलने वाली
तमाम छूट खत्म कर दी जाएगी. राष्ट्रपति के विज़न को लागू करने के लिए आगे
कई नियम और ऐक्शन होंगे.
ब्रायन ने कहा, "मुझे लगता है कि आने
वाले दिनों में चीन के संबंध में कई कदम देखेंगे. अमेरिका का कोई भी
राष्ट्रपति चीन के खिलाफ उस तरह से नहीं खड़ा हुआ है जिस तरह से डोनाल्ड
ट्रंप डटे हैं. वह पहले अमेरिकी राष्ट्रपति हैं जिसने व्यापार असंतुलन खत्म
करने के लिए चीनी सामान पर भारी-भरकम टैरिफ लगाया."