अफगानिस्तान में एक बार फिर तालिबान युग की शुरुआत हो गई है. तालिबानियों का कब्जा अब पूरे अफगानिस्तान में है. तालिबान ने ऐलान किया है कि वह सभी नागरिकों को माफ करेगा और महिलाओं को भी अपने कानून के हिसाब से आजादी देगा. तालिबान के इस ऐलान पर ब्रिटिश प्रधान मंत्री बोरिस जॉनसन ने बुधवार को कहा कि तालिबान को उनके कार्यों पर आंका जाएगा, उनके शब्दों पर नहीं.
दरअसल बोरिस जॉनसन से पत्रकारों ने सवाल किया था कि सदन में तालिबान पर चर्चा कैसी रही. दरअसल तालिबान ने कहा है कि वे शांति चाहते हैं, पुराने दुश्मनों से बदला नहीं लेंगे और इस्लामी कानून के दायरे में महिलाओं के अधिकारों का सम्मान करेंगे. इसके उलट जमीनी हकीकत ये है कि हजारों अफगान, जिन्होंने कई ने विदेशी बलों की मदद की थी वे अफगानिस्तान छोड़ने के लिए बेताब हैं.
बोरिस जॉनसन ने कहा, 'हम इस शासन को उनके द्वारा चुने गए विकल्पों के आधार पर देखेंगे. उनके शब्दों के बजाय उनके कार्यों के आधार पर उनकी परख की जाएगी. आतंकवाद के प्रति उनका कैसा रवैया है, अपराध और नशीले पदार्थों पर उनका क्या सोचना है. साथ-साथ मानवीय पहुंच में कितने मददगार वे हैं और महिला शिक्षा और अधिकारों के प्रति उनका रुख क्या है, इस पर हम उनका मूल्यांकन करेंगे.'
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विपक्ष ने की है बोरिस जॉनसन की आलोचना
बोरिस जॉनसन अपने देश में मुख्य विपक्षी पार्टी के निशाने पर हैं. लेबर पार्टी के नेका स्टारर ने कहा था कि उन्होंने अफगान संकट के बीच शनिवार को हॉलीडे प्लानिंग की थी. यह लापरवाह नेतृत्व का उदाहरण है.
तालिबान को मान्यता देने पर क्या बोले बोरिस जॉनसन?
वहीं अफगानिस्तान पर हो रही चर्चा के दौरान ब्रिटिश पीएम बोरिस जॉनसन ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान से कहा कि अफगानिस्तान में नई सरकार को मान्यता एकपक्षीय आधार पर नहीं देनी चाहिए. यह वैश्विक स्तर पर ही होगा.
क्या तालिबान को मान्यता देगा चीन?
चीन ने बुधवार को कहा कि वह अफगानिस्तान में सरकार के गठन के बाद ही तालिबान को राजनयिक मान्यता देने पर फैसला करेगा. ऐसी सरकार जो समावेशी हो और व्यापक स्तर पर लोगों का प्रतिनिधित्व करे. चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजिआन ने यह कहा है कि अफगान मुद्दे पर चीन की स्थिति सुसंगत और स्पष्ट है.