scorecardresearch
 

अफगानिस्तान में कदम-कदम पर खतरा, 'लाइफ लाइन' पर कब्जे की कोशिश में तालिबान

तालिबान (Taliban) जानता है कि अगर उसे अफगानिस्तान (Afghanistan) पर कब्जा करना है तो अफगानिस्तान के हाईवे (HighWays) पर कब्जा करना होगा और अफगान फोर्सेज किसी भी कीमत पर ऐसा होने नहीं देना चाहतीं.

Advertisement
X
अफगानिस्तान में जारी है संघर्ष
अफगानिस्तान में जारी है संघर्ष
स्टोरी हाइलाइट्स
  • अफगानिस्तान में हाईवे पर कब्जे की कोशिश
  • कदम-कदम पर तालिबानी आतंकियों से खतरा
  • हाईवे बचाने में जुटी अफगान फोर्सेज

अफगानिस्तान (Afghanistan) जहां से अमेरिका (US) ने बीस साल बाद अपने कदम वापस खींच लिए, उस अफगानिस्तान में अब कदम-कदम पर तालिबान (Taliban) के आतंकवादियों का खतरा है. तालिबान जानता है कि अगर उसे अफगानिस्तान पर कब्जा करना है तो अफगानिस्तान के हाईवे पर कब्जा करना होगा और अफगान फोर्सेज किसी भी कीमत पर ऐसा होने नहीं देना चाहतीं. काबुल से कंधार जाने वाले हाइवे पर 'आजतक' की मुलाकात अफगान फोर्स की एक ऐसी ही टुकड़ी से हो गई, जो इस हाइवे को तालिबान के कब्जे से बचाने के लिए तैनात है. 

Advertisement

कई बड़े हाईवे और बॉर्डर पोस्ट्स पर किया कब्जा

तालिबान ने पाकिस्तान, ईरान, ताजिकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान को जोड़ने वाले हेरात, फरहा, कंधार, कुंदुज, तखर और बदख्शां प्रांतों में कई बड़े हाईवे और बॉर्डर पोस्ट पर कब्जा कर लिया है. जबकि अफगानिस्तान की फोर्स अभी नंगरहार, पक्त्या, पक्तिका, खोस्त और निमरोज प्रांतों में ईरान और पाकिस्तान से लगती बॉर्डर पोस्ट पर कब्जा जमाए हुए है. दरअसल, तालिबान की साजिश काबुल की सप्लाई लाइन काट देने की है. इसके सबूत काबुल से जलालाबाद जाते हुए रास्ते में आजतक ने रिकॉर्ड किए.

कंधार हाईवे पर भी तालिबान का कब्जा

जंग की सबसे बड़ी रणनीति हाइवे को काबू करना होता है. अधिकतर राजमार्गों पर तालिबान के कब्जे की कोशिशें रही हैं. कई जगह तालिबान सफल भी हुआ है. कंधार हाइवे है, जो मेन सप्लाई लाइन मानी जाती है. उसपर तालिबान का कब्जा है. जलालाबाद काबुल के बीच हाइवे पर न सिर्फ तालिबान अफगान फौजों पर हमला कर रहा है, बल्कि इस सप्लाई लाइन पर आईएसआईएस की भी नजर है.

Advertisement
हाईवे पर कब्जे की कोशिश में  तालिबान
हाईवे पर कब्जे की कोशिश में तालिबान

दरअसल, तालिबान यह जानता है कि अगर उसने राजधानी काबुल और अन्य सरकार नियंत्रित क्षेत्रों को जरूरी सामान की सप्लाई रोक दी तो अफगानिस्तान में पैर पसारने में उसे ज्यादा वक्त नहीं लगेगा. इसी रणनीति के तहत वह एक के बाद एक अफगानिस्तान के हाइवे को निशाना बना रहा है, जिसका असर अब अफगानिस्तान में दिखना शुरू भी हो चुका है अब अफगानी फोर्सेज के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन हाइवे को तालिबान से बचाना है, जिसके लिए वो दिन-रात एक किए हुए हैं.

यह भी पढ़ें: दानिश को गोली मारने के बाद तालिबानियों ने सिर भी गाड़ी से कुचला, अफगान कमांडर ने बताई डरावनी सच्चाई

अफगानिस्तान-पाकिस्तान में चल रही जुबानी जंग

इन दिनों तालिबान के मुद्दे पर अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच जुबानी जंग चल रही है, जिसमें एक तस्वीर के जरिये अफगानिस्तान के उप-राष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह ने पाकिस्तान के 50 साल पुराने जख्मों पर मुट्ठी भरके नमक छिड़क दिया है. सालेह ने 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद भारतीय सेना के सामने पाकिस्तान की सेना के ऐतिहासिक सरेंडर की तस्वीर को ट्वीट करके उस पाकिस्तान पर तंज किया है, जो अफगानिस्तान में दोबारा तालिबान का राज कायम करने के सपने देख रहा है.

अफगान सेना और तालिबान के बीच संघर्ष जारी
अफगान सेना और तालिबान के बीच संघर्ष जारी

अफगानी उपराष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह ने तस्वीर को ट्वीट करते हुए लिखा कि हमारे इतिहास में ऐसी कोई तस्वीर नहीं है और न कभी होगी. तारीख थी- 16 दिसंबर 1971. जब भारतीय सेना के सामने पाकिस्तानी जनरल अमीर अब्दुल्ला खां नियाज़ी ने आत्मसमर्पण के कागज पर हस्ताक्षर किया था. पाकिस्तान तब भी अपनी बेइज्जती पर वैसे ही पर्दा डाल रहा था, जैसे आजतक डालता आ रहा है.

Advertisement

पाक को बेइज्जत कर रहा अफगानिस्तान

वैसे पाकिस्तान को यह तस्वीर देखकर शर्म तो बिलकुल नहीं आई होगी, क्योंकि अफगानिस्तान ने तो तालिबान के हिमायती बने पाकिस्तान को बेइज्जत करने की बाकायदा पूरी सीरीज चलाई हुई है. पाकिस्तान में अफगान राजदूत नजिबुल्लाह अलीखेल की बेटी सिलसिला अलीखेल को अगवा कर पीटे जाने के बाद रविवार को अफगानिस्तान ने पाकिस्तान में अपना दूतावास बंद कर दिया.

इससे पहले अफगानिस्तान के उपराष्ट्रपति सालेह पाकिस्तानी वायुसेना पर तालिबान आतंकवादियों को सुरक्षा मुहैया करवाने का आरोप लगा चुके हैं और पिछले सप्ताह ही मध्य और दक्षिण एशिया संपर्क सम्मेलन में अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने इमरान खान के मुंह पर कह दिया था कि पाकिस्तान ने तालिबान से अपने संबंध नहीं तोड़े हैं.


Advertisement
Advertisement