प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिका दौरे में दोनों देशों के बीच एक अहम समझौता हुआ है जिससे रूस को बड़ा झटका लग सकता है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में पीएम मोदी से द्विपक्षीय मुलाकात के बाद शुक्रवार को कहा कि दोनों देश समझौते के तहत इस बात पर सहमत हुए हैं कि भारत अमेरिका से और अधिक तेल और गैस खरीदेगा. राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि यह समझौता अमेरिका को भारत का शीर्ष तेल और गैस आपूर्तिकर्ता बना देगा. उनका कहना है कि इस समझौते से दोनों देशों के बीच का व्यापार घाटा कम होगा.
समझौते के लेकर भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि बहुत संभावना है कि अमेरिका से भारत की तेल और गैस खरीद में बढ़ोतरी होगी. पिछले साल भारत ने अमेरिका से करीब 15 अरब डॉलर का तेल गैस खरीदा था. विदेश सचिव ने कहा कि जल्द ही अमेरिका से तेल और गैस की खरीद बढ़कर 25 अरब डॉलर हो जाएगी.
भारत पहले से ही अमेरिकी तेल और गैस का एक महत्वपूर्ण खरीदार है. अमेरिका भारत का पांचवां सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता है और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) का भी एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता है.
अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है भारत
भारत दुनिया में कच्चे तेल का तीसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है और अपनी 85 प्रतिशत से अधिक जरूरतों को पूरा करने के लिए आयात पर निर्भर है. भारत एलएनजी या सुपर-चिल्ड गैस का भी बड़ा आयातक है और लगभग 50 प्रतिशत जरूरतों को पूरा करने के लिए आयात पर निर्भर है.
भारत के आधिकारिक व्यापार आंकड़ों के अनुसार, जनवरी-नवंबर 2024 में भारत ने अमेरिका से 72 लाख टन तेल आयात किया जो कि भारत के कुल तेल आयात का 3.2% है.
रूस फिलहाल भारत का शीर्ष तेल आपूर्तिकर्ता है, उसके बाद इराक, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और अमेरिका हैं.
तो क्या भारत का शीर्ष आपूर्तिकर्ता नहीं रह जाएगा रूस?
समझौते में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि जल्द अमेरिका भारत का शीर्ष तेल और गैस आपूर्तिकर्ता बन जाएगा. अगर ऐसा होता है तो भारत का पारंपरिक दोस्त रूस पीछे छूट जाएगा. भारत फिलहाल सबसे अधिक कच्चा तेल रूस से खरीदता है.
इसी साल जनवरी की शुरुआत में आई एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की रूसी तेल पर निर्भरता कम हुई है लेकिन रूस अभी भी भारत का शीर्ष कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है.
ऊर्जा कार्गो ट्रैकिंग फर्म वोर्टेक्सा ने बताया था कि दिसंबर 2024 में भारत के आयात में रूसी कच्चे तेल का हिस्सा 31% है. उस दौरान भारत के तेल आयात में अमेरिका का हिस्सा केवल 1% था.
नवंबर (36%) और दिसबंर 2024 (31%) में रूसी तेल आयात में गिरावट देखी गई थी क्योंकि रूस ने कच्चे तेल पर भारत को छूट देनी कम कर दी है.
रूस कैसे बन गया भारत की शीर्ष तेल आपूर्तिकर्ता?
फरवरी 2022 से पहले भारत के कुल तेल आयात में रूसी तेल का हिस्सा 2% से भी कम था. 24 फरवरी 2022 को रूस-यूक्रेन युद्ध की शुरुआत के बाद अमेरिका समेत पश्चिमी देशों और यूरोपीय यूनियन ने रूसी तेल का बहिष्कार शुरू कर दिया.
इसके बाद रूस ने भारत और चीन जैसे एशिया के अपने दोस्तों को रियायती दरों पर कच्चा तेल खरीद का ऑफर दिया. युद्ध की वजह से तेल की कीमतों में बढ़ोतरी को देखते हुए भारत रूस से सस्ता तेल खरीदने लगा.
रूसी तेल पर भारत को लगभग 10 डॉलर प्रति बैरल की छूट मिली. देखते ही देखते रूस भारत का शीर्ष आपूर्तिकर्ता बन गया और भारत के कुल तेल खरीद में रूसी तेल का हिस्सा 44% तक जा पहुंचा.
लेकिन इसी बीच अमेरिका और यूरोपीय देशों ने रूसी तेल का एक प्राइस कैप भी तय कर दिया गया ताकि उसके राजस्व पर दबाव पड़े और वो युद्ध में कमजोर हो. प्राइस कैप के तहत रूसी तेल की अधिकतम कीमत तय कर दी गई और कहा गया कि रूस अपने तेल को 60 डॉलर प्रति बैरल से अधिक कीमत पर नहीं बेच पाएगा.
रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत की काफी आलोचना भी हुई जिसका भारत ने सख्ती से जवाब दिया. भारत ने कहा कि वो अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए राष्ट्र हित में रूस से तेल खरीदना जारी रखेगा.
रूसी तेल खरीद से भारत की बड़ी रिफाइनरियों को काफी लाभ भी हुआ क्योंकि उन्होंने रूस से सस्ता तेल खरीदकर रिफाइनिंग के बाद उसे बाजार कीमत पर यूरोपीय देशों को बेचा.
हालांकि, समय के साथ-साथ रूसी तेल में मिलने वाली छूट कम हुई है. फिर भी यह भारत को अन्य देशों के तेल की अपेक्षा सस्ता पड़ता है जिस कारण रूस भारत का शीर्ष तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है. अब अगर अमेरिका भारत का शीर्ष तेल और गैस आपूर्तिकर्ता बनता है तो रूस पीछे छूट जाएगा. हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि अमेरिकी तेल भारत को कितना महंगा या सस्ता पड़ेगा.